DISHA की बैठक में राहुल गांधी भिड़ेDISHA की बैठक में राहुल गांधी भिड़े

DISHA की बैठक में राहुल गांधी भिड़े

यूपी के रायबरेली में इन दिनों सियासी हलचलें चरम पर हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के दो दिवसीय दौरे ने जिले की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। इस दौरे के दौरान जहां राहुल गांधी ने विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत की, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और कभी कांग्रेस में रहे दिनेश प्रताप सिंह ने उनके खिलाफ जमकर मोर्चा खोल दिया।

राहुल गांधी के आगमन से पहले ही दिनेश सिंह ने हाईवे पर धरना प्रदर्शन किया और ‘राहुल गांधी वापस जाओ’ के नारे लगाए। इतना ही नहीं, दिशा (जिला विकास समन्‍वय और निगरानी समिति) की बैठक के दौरान भी मंत्री दिनेश सिंह और राहुल गांधी के बीच तीखी बहस देखने को मिली। लेकिन, इस सियासी गर्मी के बीच एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसने सबका ध्यान खींचा और राजनीतिक चर्चाओं को एक नया मोड़ दे दिया।

दरअसल, ‘दिशा’ बैठक के दौरान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बेटे और हरचंदपुर के ब्लॉक प्रमुख पियूष प्रताप सिंह राहुल गांधी से हाथ मिलाते हुए नजर आए। तस्वीर में दोनों मुस्कुराते हुए दिख रहे हैं और दिलचस्प बात यह रही कि इस दौरान खुद दिनेश प्रताप सिंह पीछे खड़े होकर इस दृश्य को मुस्कान के साथ देख रहे थे।

इस वायरल तस्वीर ने रायबरेली की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर जहां एक वर्ग इसे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति में दरार बता रहा है, वहीं कुछ लोग इसे एक सामान्य औपचारिकता का रूप मान रहे हैं। जनता के बीच यह संदेश भी गया कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं लेकिन संवाद और मुलाकात के द्वार हमेशा खुले रहते हैं।

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से चुनाव लड़ते हुए दिनेश प्रताप सिंह को लगभग 3.90 लाख वोटों से पराजित किया था। इसके बाद से ही दिनेश प्रताप सिंह लगातार राहुल गांधी और गांधी परिवार के खिलाफ मुखर रहे हैं।

हाल ही में एक और विवाद तब खड़ा हो गया जब बिहार कांग्रेस की ओर से एक एआई जनरेटेड वीडियो जारी किया गया। इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां जैसे दिखने वाले किरदारों के माध्यम से मोदी पर व्यंग्यात्मक आरोप लगाए गए। इस वीडियो को लेकर दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी की पीआर टीम पर तीखा हमला बोला।

एक वीडियो में दिनेश प्रताप सिंह कहते नजर आ रहे हैं, “बहुत दुख हो रहा है ये देखकर कि राहुल गांधी को ये कांग्रेसी कहां ले जाना चाहते हैं। यह भारतीय जनता पार्टी नहीं बल्कि कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति है कि जब तक गांधी परिवार खत्म नहीं होगा, तब तक सामान्य कांग्रेसी को राजनीति करने का अवसर नहीं मिलेगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि, “कांग्रेसी ही राहुल गांधी के सबसे बड़े दुश्मन हैं। गांधी परिवार को गड्ढे में गिराने के लिए बार-बार मोदी जी की मां का उपयोग करते हैं। इससे कांग्रेस को देशभर में नुकसान होगा। भारतीय संस्कृति और संस्कारों के खिलाफ इस तरह के हमले न राहुल गांधी को फायदा देंगे, न कांग्रेस को।”

दिनेश सिंह के इन बयानों से कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी तकरार और गहरी हो गई है। दिनेश सिंह इससे पहले भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर कई विवादित टिप्पणियां कर चुके हैं। एक बयान में उन्होंने यहां तक कहा था कि इंदिरा गांधी सबसे बड़ी चोर थीं और राहुल गांधी उनके “चोर नाती” हैं।

उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह रायबरेली को केवल “पिकनिक स्पॉट” की तरह इस्तेमाल करते हैं और जिले के विकास में कोई योगदान नहीं देते।

हालांकि, राहुल गांधी के दौरे के दौरान पियूष प्रताप सिंह की वह तस्वीर भाजपा की आंतरिक राजनीति में एक अलग संकेत देती नजर आ रही है। जहां एक ओर मंत्री दिनेश सिंह अपने समर्थकों के साथ राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं उनके बेटे का राहुल से हाथ मिलाना भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर रहा है।

इस मुलाकात को लेकर भाजपा के अंदर भी कुछ नेताओं की नाखुशी सामने आ रही है। वहीं, कांग्रेस समर्थकों ने इस तस्वीर को गांधी परिवार की लोकप्रियता और व्यक्तिगत शालीनता का प्रतीक बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तस्वीर ने यह संदेश दिया है कि विरोध चाहे जितना तीखा हो, राजनीतिक मुलाकातें और संवाद का मंच हमेशा खुला होता है। रायबरेली की राजनीति में यह पल इसलिए भी खास बन गया क्योंकि यह वही स्थान है जहां कांग्रेस और भाजपा की सीधी टक्कर लंबे समय से चली आ रही है।

राहुल गांधी के इस दौरे ने जिले की राजनीति को नई दिशा दी है और साथ ही भाजपा के भीतर कुछ अनकहे सवाल भी खड़े कर दिए हैं।