हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन रविवार को गुरुग्राम में हुए युवा कांग्रेस के शपथ ग्रहण समारोह ने यह साफ कर दिया कि हुड्डा गुट अब भी संगठन में सबसे मजबूत और सक्रिय है। इस आयोजन की अगुवाई युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष निशित कटारिया ने की, लेकिन असली चेहरा और लीडरशिप रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा की थी। कार्यक्रम में 450 से ज्यादा पदाधिकारियों ने शपथ ली। मंच पर प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान भी मौजूद रहे, लेकिन कार्यक्रम के पोस्टर से कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं — कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला की तस्वीरें नदारद थीं।यह कोई साधारण चूक नहीं थी, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश था कि यह शो पूरी तरह हुड्डा खेमे का है। युवा कांग्रेस की ओर से इस कार्यक्रम के लिए लगभग 5,000 नेताओं और कार्यकर्ताओं को बुलावा भेजा गया था। इसमें वरिष्ठ नेता, मौजूदा और पूर्व विधायक, पीसीसी पदाधिकारी सभी शामिल थे। फिर भी, सैलजा और सुरजेवाला जैसे नेता इसमें नहीं पहुंचे।
हर गुट अपने-अपने तरीके से ताकत दिखाने में लगा
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह अंदरूनी खींचतान का नतीजा है, जहां हर गुट अपने-अपने तरीके से ताकत दिखाने में लगा है। दीपेंद्र हुड्डा ने भाषण में भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने साम, दाम, दंड, भेद की राजनीति करके सत्ता हथियाई।”भाजपा ने वोट चोरी किए, जात-पात का खेल खेला और सत्ता में बैठी। लेकिन कार्यकर्ता टूटे नहीं। यह जो आप भीड़ देख रहे हैं, यह सिर्फ ट्रेलर है। अगली बार पिक्चर हिट होकर ही रहेगी।”यह बयान सिर्फ भाजपा पर हमला नहीं था, बल्कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाने की कोशिश थी कि हुड्डा गुट ही उन्हें जीत दिला सकता है।प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान ने चुनाव आयोग को लेकर तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा “राहुल गांधी ने इलेक्शन कमिशन का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है। हरियाणा में विधानसभा चुनाव चोरी हुए थे और इसके पुख्ता सबूत हमारे पास हैं।”उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सच्चाई जनता तक पहुंचाएं।
कार्यकर्ताओं के बीच हुड्डा गुट का असर सबसे ज्यादा
हरियाणा कांग्रेस में फिलहाल तीन बड़े गुट माने जाते हैं, हुड्डा गुट, सैलजा गुट, और सुरजेवाला गुट।इस कार्यक्रम ने साफ कर दिया कि कार्यकर्ताओं के बीच हुड्डा गुट का असर सबसे ज्यादा है। गुरुग्राम में हुई यह भीड़ और जोश, जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से पहले हुड्डा गुट का एक साफ शक्ति प्रदर्शन था।पिछले 11 साल से कांग्रेस का संगठन सक्रिय रूप से काम नहीं कर रहा, लेकिन हुड्डा गुट अपने नेटवर्क और जमीनी पकड़ से पार्टी के भीतर मजबूत स्थिति बनाए हुए है।बरोदा से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ चुके प्रदीप नरवाल ने मंच से कहा कि “विभीषण को मौका नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि वे घर को खत्म कर देते हैं।”यह बयान साफ तौर पर पार्टी के अंदर उन नेताओं पर इशारा था जो अपने गुट के खिलाफ जाकर विरोधी खेमे से मेलजोल रखते हैं।इस कार्यक्रम का मकसद सिर्फ युवा नेताओं को शपथ दिलाना नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि अगर हरियाणा कांग्रेस को जीत दिलानी है, तो हुड्डा गुट को ही कमान देनी होगी।पोस्टरों से लेकर मंच तक, हर चीज में हुड्डा गुट की छाप साफ नजर आई
