28 SHOPS: हरिद्वार: कांवड़ यात्रा से पहले प्रशासन का बड़ा फैसला
श्रावण मास के अवसर पर हर साल लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं और पवित्र गंगा जल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। इस बार भी श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही हरिद्वार में कांवड़ मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी क्रम में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली शराब की दुकानों (28 SHOPS) को पर्दों से ढकने का आदेश दिया है।

हरिद्वार के जिलाधिकारी ने इस संबंध में आबकारी विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार, कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित शराब की दुकानों (28 SHOPS) और उनसे संबंधित साइन बोर्डों को पूरी तरह से ढकना अनिवार्य होगा। प्रशासन का यह कदम श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सौहार्द्र को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
हरिद्वार जिले के आबकारी अधिकारी कैलाश चंद्र बिंजोला ने जानकारी देते हुए बताया कि, कांवड़ यात्रा मार्ग पर कुल 28 ऐसी शराब (28 SHOPS) की दुकानें चिन्हित की गई हैं, जिन्हें पर्दों से ढका जाएगा। इन दुकानों (28 SHOPS) का पहले ही सर्वेक्षण कर लिया गया है और अब इन्हें कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ढकने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने बताया कि, “श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना हमारी प्राथमिकता है। कांवड़ यात्रा के दौरान करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि यात्रा मार्ग पर किसी भी प्रकार की ऐसी वस्तु या दृश्य न हों, जो उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सके।”
यह स्पष्ट किया गया है कि इन दुकानों (28 SHOPS) को पूरी तरह से बंद नहीं किया जाएगा। केवल दुकानों के सामने पर्दे लगाकर उन्हें श्रद्धालुओं की नजरों से छुपाया जाएगा। इसके अलावा दुकान के बाहर लगे साइन बोर्ड, विज्ञापन और शराब (28 SHOPS) से संबंधित अन्य कोई प्रचार सामग्री भी पूरी तरह ढकी जाएगी।
बिंजोला ने कहा कि, “यह एक एहतियाती कदम है, जिससे किसी तरह का टकराव या असंतोष उत्पन्न न हो। हमारा उद्देश्य किसी की आजीविका को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि धार्मिक समरसता और सामाजिक शांति बनाए रखना है।”
जिला प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि जो दुकानदार इन आदेशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे दुकानदारों को नोटिस जारी किया जाएगा और आबकारी अधिनियम के तहत दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
आबकारी विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है और संबंधित दुकानदारों को समय रहते आवश्यक तैयारियां करने के लिए सूचित कर दिया गया है। सभी दुकानों को कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही ढक दिया जाएगा।
प्रशासन के इस फैसले को श्रद्धालुओं और स्थानीय समाजसेवी संगठनों ने सराहा है। कई लोगों का कहना है कि हरिद्वार एक धार्मिक नगरी है और कांवड़ यात्रा जैसे अवसर पर धार्मिक आस्था सर्वोपरि होनी चाहिए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि “यह बहुत अच्छा निर्णय है। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अनचाही स्थिति से बचा जा सकेगा।”
वही श्रद्धालुओं से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि “जब हम इतनी दूर से आस्था लेकर आते हैं तो ऐसे दृश्य (28 SHOPS) तकलीफ देते हैं। प्रशासन का यह कदम हमारे लिए एक सकारात्मक संदेश है।”
हर साल की तरह इस बार भी कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और स्वयंसेवी संस्थाएं मिलकर यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने में जुटी हैं।
हरिद्वार में कांवड़ मेले के दौरान लाखों लोगों की भीड़ जुटती है, जिससे ट्रैफिक, स्वास्थ्य, सफाई और सुरक्षा जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। इन सभी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन हर स्तर पर कार्य कर रहा है।
अब देखने वाली बात ये है कि क्या कांवड़ यात्रा बिल्कुल सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न होती है या नहीं।

