LAND FRAUD: उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड का बड़ा मामलाLAND FRAUD: उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड का बड़ा मामला

LAND FRAUD: उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड का बड़ा मामला

उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड (LAND FRAUD) के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार जो मामला नैनीताल जिले के हल्द्वानी से सामने आया है, उसने न केवल आम जनता बल्कि प्रशासन को भी चौंका दिया है। मुखानी थाना क्षेत्र में सामने आए इस फर्जीवाड़े में भू-माफियाओं ने विभागीय मिलीभगत के जरिए सरकारी सड़क की जमीन को निजी बताते हुए सेना के जवान समेत कुल 9 लोगों को बेच(LAND FRAUD) डाला। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि, इस जमीन(LAND FRAUD) की बाकायदा रजिस्ट्री भी कर दी गई थी और किसी को भनक तक नहीं लगी

LAND FRAUD: उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड का बड़ा मामला
इस पूरे फर्जीवाड़े(LAND FRAUD) का खुलासा तब हुआ जब पीड़ितों में से एक सेना के जवान ने कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की जनसुनवाई में अपनी आपबीती सुनाई। मामला संज्ञान में आते ही कमिश्नर ने तत्काल पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद हल्द्वानी के मुखानी थाना में प्रॉपर्टी डीलर(LAND FRAUD) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

LAND FRAUD: उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड का बड़ा मामला
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इस मामले की एक और चौंकाने वाली बात ये है कि पीड़ितों को लगभग 14 साल बाद पता चला कि उनके साथ धोखा(LAND FRAUD) हुआ है। दरअसल, हल्द्वानी के दमुवाढूंगा स्थित तिलक मार्केट निवासी एक व्यक्ति भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात हैं और फिलहाल कश्मीर में पोस्टेड हैं। उन्होंने वर्ष 2011 में अपनी पत्नी के नाम से मुखानी क्षेत्र के रामड़ी आनसिंह में 1900 वर्ग फीट जमीन एक स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर(LAND FRAUD) के माध्यम से खरीदी थी।

सेना के जवान ने उस समय जमीन की रजिस्ट्री भी कराई थी और चारदीवारी बनवा कर अपने प्लॉट को चिन्हित कर दिया था। हर बार छुट्टी पर आने पर वह अपनी जमीन देखने जरूर आते थे। लेकिन इस बार जब वह जमीन देखने पहुंचे तो देखा कि उस पर किसी और ने तारबाड़ कर दी है

LAND FRAUD: उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड का बड़ा मामला
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जवान ने जब नजदीकी रजिस्ट्री कार्यालय में जाकर जानकारी हासिल की तो पता चला कि जिस खेत नंबर पर उन्होंने जमीन खरीदी थी, उसी नंबर की जमीन की रजिस्ट्री किसी अन्य महिला – तरुणा वर्मा – के नाम पर है। जब उन्होंने खेत संख्या के आधार पर जांच कराई तो सामने आया कि यह जमीन दरअसल सड़क की है और इस पर किसी भी प्रकार की निजी मिल्कियत नहीं हो सकती।

इसके बाद उन्होंने प्रॉपर्टी डीलर हेम चन्द्र जोशी के भाई सुरेश चन्द्र जोशी से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें जमीन बेची थी। लेकिन बात बनने के बजाय और उलझ गई, क्योंकि मौके पर ऐसा कोई प्लॉट था ही नहीं।

पटवारी से संपर्क करने पर यह स्पष्ट हुआ कि यह जमीन सरकारी सड़क के हिस्से में आती है और इसे निजी बताते हुए बेचना पूरी तरह से अवैध है। जब इस मामले की गहन जांच कराई गई तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया – ऐसी 9 फर्जी रजिस्ट्रियां की गई थीं और नौ लोगों को सड़क की जमीन बेच दी गई थी।

सेना के जवान ने इस पूरे मामले को कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की जनसुनवाई में उठाया। मामला गंभीर होने के कारण कमिश्नर ने त्वरित संज्ञान लिया और मुखानी थाना पुलिस को निर्देश दिए कि दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।

LAND FRAUD: उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड का बड़ा मामला
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फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और संबंधित विभागों से भूमि अभिलेख, नक्शा, रजिस्ट्रियों की प्रतियां और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। यह भी जांच की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में विभागीय कर्मियों की क्या भूमिका रही है और क्या रजिस्ट्री कार्यालय या राजस्व विभाग के किसी कर्मचारी ने इस अवैध रजिस्ट्री को पास किया था।

LAND FRAUD: उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड का बड़ा मामला
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पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि जानबूझकर गलत भूमि विवरण देकर कई लोगों को ठगा गया है। अगर इसमें किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर से उत्तराखंड में लैंड माफिया के सक्रिय नेटवर्क और सरकारी तंत्र की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।