हरियाणा के हिसार में पकड़े गए 39 अवैध बांग्लादेशी, पुलिस जांच में जुटी

हरियाणा के हिसार जिले के हांसी शहर में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 39 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है। ये सभी लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे थे और शहर के बाहरी इलाके तोशाम रोड पर स्थित एक ईंट भट्टे पर मजदूरी कर रहे थे। पकड़े गए लोगों में 14 पुरुष, 11 महिलाएं और 14 बच्चे शामिल हैं। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि ये सभी लोग बांग्लादेश से बॉर्डर पार करके भारत आए थे, लेकिन इनके पास कोई वैध दस्तावेज या पहचान पत्र नहीं मिला। ये भी नहीं बताया कि इन्हें बॉर्डर पार कराने में किसने मदद की।

सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं। हांसी पुलिस ने सभी 39 लोगों को सदर थाने लाकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस यह जानने में जुटी है कि ये लोग कब से भारत में रह रहे हैं, और इनका यहां तक पहुंचने का तरीका क्या रहा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इनके पीछे कोई मानव तस्करी गिरोह सक्रिय है।

भट्ठों और फैक्ट्रियों में काम कर रहे मजदूरों की होगी जांच

हांसी के पुलिस अधीक्षक (SP) अमित यशवर्धन ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई थी। अभी इनकी कागजी कार्रवाई की जा रही है और कानूनी पहलुओं की भी जांच चल रही है। दस्तावेज पूरे होने के बाद इन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल, आसपास कोई डिपोर्टेशन कैंप नहीं होने के कारण इन्हें दिल्ली स्थित बांग्लादेशी कैंप में भेजने की तैयारी है। SP ने यह भी बताया कि पुलिस अब लगातार भट्ठों और फैक्ट्रियों में काम कर रहे मजदूरों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिक तो नहीं हैं। यह प्रक्रिया आने वाले दिनों में और भी सख्ती से जारी रहेगी।

महेंद्रगढ़ में भी पकड़े गए थे 14 बांग्लादेशी

इससे ठीक 15 दिन पहले हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में भी पुलिस ने 14 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा था। ये लोग भी ईंट भट्टे पर काम कर रहे थे और पश्चिम बंगाल के पते पर फर्जी आधार कार्ड बनवाकर रह रहे थे। पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की, तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे बांग्लादेश के नागरिक हैं। इन 14 लोगों में 3 पुरुष, 4 महिलाएं और 7 बच्चे शामिल थे। इनमें से एक परिवार 2008 में और दो परिवार 2021 में भारत में दाखिल हुए थे, और पिछले तीन साल से स्थानीय ईंट भट्टे पर मजदूरी कर रहे थे।

 

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