उत्तर प्रदेश

रामभद्राचार्य ने अबकी बार प्रेमानंद पर कह दी ये बड़ी बात ?

रामभद्राचार्य ने अबकी बार प्रेमानंद पर कह दी ये बड़ी बात ?

एक इंटरव्यू के बाद एक ऐसी आंधी आती है जो दो संतों को आमने-सामने लाकर खड़ी कर देती है। हालांकि उस बातचीत में ऐसा कुछ नहीं जिस पर इतनी बड़ी बहस हो। और संतों में इस तरह का उबाल दिखना उन्हीं संतों पर सवाल खड़े करता है। क्या वो वाकई संतों का जीवन जीना चाहते हैं या फिर वही आम व्यक्तियों वाला जीवन जहां अगर किसी बड़े ने कुछ कहा तो उसपर अम्ल करने की बजाय उसकी निंदा की जाए। आइए आपको सबसे पहले बता देते हैं कि, आखिर जगतगुरू रामभद्राचार्य ऐसा क्या बोल गए थे जिस पर इतना विवाद हुआ

उन्होंने कहा कि,
” कोई चमत्कार नहीं है। मैं चैलेंज करता हूं यदि चमत्कार है तो प्रेमानंद जी मेरे सामने एक अक्षर संस्कृत बोलकर दिखा दें। या मेरे द्वारा कहे गए किसी भी श्लोक का अर्थ समझाएं। लोकप्रियता क्षणभंगुर है। प्रेमानंद ‘बालक के समान’ हैं।”

तुलसी पीठाधीश्वर पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने ये बातें एक इंटरव्यू में कहीं थीं, जो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस बयान पर ब्रज के साधु-संतों में काफी नाराजगी देखी जा रही है।
वही विवाद बढ़ता देख तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा- मैंने प्रेमानंद पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है। वो मेरे बालक के समान हैं। वो जब भी मेरे पास मिलने आएंगे। मैं उनको गले से लगाऊंगा, उन्हें आशीर्वाद दूंगा। साथ ही भगवान रामचंद्र से उनकी दीर्घायु की कामना करूंगा।

मैंने किसी तंत्र के खिलाफ टिप्पणी नहीं की है और न करता हूं। मैं आचार्य होने के नाते सबको यह कहता हूं कि संस्कृत पढ़ना चाहिए। चोला पहनकर जो लोग कथा कहते हैं, उनको कुछ आता-जाता नहीं है। उनको पढ़ना सीखना चाहिए।
इससे पहले रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने भी सफाई दी थी। उन्होंने कहा था, जगद्गुरु सबके गुरु होते हैं। सारी प्रजा उनके पुत्र के समान होती है। जगद्गुरु की बातों को इस तरह से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। प्रेमानंद जी से गुरुदेव (जगद्गुरु रामभद्राचार्य) को किसी प्रकार की ईर्ष्या नहीं है।

प्रेमानंद महाराज या बाकी कथावाचक पिछले काफी समय से मंच से तमाम तरह की बातें बोल रहे थे। कभी बच्चियों के बारे में कभी माताओं के बारे में, इसे लेकर मीडिया में डिबेट चल रही थी। इसी बात को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के मन में पीड़ा थी।

रामभद्राचार्य ने कहा- मैंने अपने उत्तराधिकारी रामचंद्र दास को भी कई बार इस बात को लेकर कहा हूं कि संस्कृत सबको पढ़नी चाहिए। संस्कृत भाषा भारत की है। मैंने कभी चमत्कार को नमस्कार नहीं किया। यह बात मैं प्रेमानंद जी के लिए नहीं कहा हूं। मैं अपने शिष्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को भी कहता हूं और डांटता हूं। मैं आज भी संस्कृत 18 घंटे पढ़ता हूं और पढ़ता रहूंगा। प्रेमानंद से मेरा कोई द्वेष भाव नहीं है। वह मेरे बेटे के समान है।

जब रामभद्राचार्य और प्रेमानंद मामले में विवाद बढ़ा तो आचार्य रामचंद्र दास ने कहा, कुछ कूप-मंडूक दो महापुरुषों के विषय में बात कर रहे हैं। उन्हें पहले स्वाध्याय यानी खुद अध्ययन करना चाहिए। गुरुदेव का सहज स्वभाव है। गुरुजी सार्वजनिक मंचों से ही अपनी बात कहते हैं। प्रधानमंत्री हों या राष्ट्रपति या स्थानीय लोग हों, किसी से भी कुछ कहना हो, वे अपनी बात बेहिचक रखते हैं।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि वर्तमान के संतों को स्वाध्याय करना चाहिए और ग्रन्थों का आश्रय लेना चाहिए। हमारे यहां 5-5 साल के बच्चे प्रवचन कर रहे हैं, जिन्हें खुद का आत्मबोध नहीं है। इसी नाते उन्होंने समाज के लिए, उन्हें जो करना चाहिए, उन्होंने वही किया है।

आचार्य रामचंद्र ने आगे कहा, सनातन संगठित हो रहा है, इससे लोगों को दिक्कत हो रही है। सोशल मीडिया पर एक जिहाद चल रहा है। लोग फर्जी तरह की आईडी बनाकर विवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। हमारे सनातन में विवाद की नहीं, संवाद की परंपरा रही है। रामजन्मभूमि के लिए मैं खड़ा रहा। जब मथुरा और विश्वनाथ बाबा की बात आएगी, तब मैं खड़ा मिलूंगा। उन्होंने प्रेमानंद जी की कोई निंदा नहीं की। उन्हें अपना बालक बताया है और कहा कि उनसे कोई विवाद नहीं हैं।

हमारे यहां शिष्य और पुत्र कितना भी बड़ा हो जाए, लेकिन उसे डांटने की परंपरा रही है। हमें भी गुरुजी सार्वजनिक मंचों से कहते हैं कि रामचंद्र दो अक्षर पढ़ लो। हमारे गुरुभाई धीरेंद्र शास्त्री को भी गुरुदेव कहते हैं कि कुछ पढ़ लो। गुरुदेव चमत्कार में भरोसा नहीं करते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इसे विवाद का विषय न बनाएं।

मीडिया से बातचीत से पहले आचार्य रामचंद्र दास ने फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखी। जिसमें कहा, वर्तमान समय में पूज्यपाद जगद्गुरु जी के एक साक्षात्कार को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह नहीं खड़ा किया जाना चाहिए था। पूज्य गुरुदेव ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि श्री प्रेमानंद जी से उन्हें किसी प्रकार की ईर्ष्या नहीं है। वे एक अच्छे संत हैं और भगवान का नाम जपने वाला प्रत्येक व्यक्ति गुरुदेव की दृष्टि में सम्मान के योग्य होता है।

Kirti Bhardwaj

Recent Posts

IRCTC तत्काल टिकट बुकिंग के नियमों में बदलाव, आधार OTP से होगी सुरक्षा मजबूत

आज के डिजिटल समय में ज्यादातर लोग अपने जरूरी काम ऑनलाइन ही करना पसंद करते…

32 minutes ago

राशन की दुकान में घुसा जंगली हाथी, चावल की बोरियां फाड़कर खाने लगा

केरल के इडुक्की जिले से इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की एक अनोखी…

2 hours ago

Sonam Wangchuk ने 26 दिन बाद तोड़ा अनशन | PM Modi का संदेश | NEET Paper Leak | CJP |

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने भूख हड़ताल (अनशन) को समाप्त…

3 hours ago

सोनम वांगचुक ने इन 3 अश्वासन पर खत्म किया अनशन, जानिए क्या है ?

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर…

3 hours ago

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े, दीपके का आया बयान

NEET पेपर लीक मामले को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक…

3 hours ago

दिल्ली में झमाझम बारिश से मिली राहत, लेकिन कई राज्यों में बना बाढ़ का संकट

राजधानी दिल्ली में आखिरकार बारिश ने दस्तक दे दी है। शहर के कई इलाकों में…

3 hours ago