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भोपाल 

मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराए जाने की मांग लंबे समय से विभिन्न माध्यमों से उठाई जा रही थी। इस संबंध में समय-समय पर प्रेस विज्ञप्तियों एवं ज्ञापनों के माध्यम से शिक्षाविद एवं प्रख्यात छात्रनेता  सचिन दवे द्वारा प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाता रहा है।

माननीय हाई कोर्ट द्वारा मध्यप्रदेश सरकार को महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दिए जाने पर  सचिन दवे ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों की पहली पाठशाला हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, उत्तरदायित्व, संवाद कौशल, संगठन क्षमता एवं जनसेवा की भावना का विकास होता है। युवाओं में सक्षम, उत्तरदायी एवं वास्तविक नेतृत्व के विकास हेतु न्यायपालिका द्वारा प्रदर्शित संवेदनशीलता एवं दूरदर्शी पहल अत्यंत सराहनीय है। इसके लिए उन्होंने माननीय न्यायपालिका के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

 दवे ने कहा कि यह निर्णय युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने तथा उनमें सक्षम, उत्तरदायी एवं वास्तविक नेतृत्व के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही यह न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा सशक्त नागरिक निर्माण की दिशा में भी प्रेरणादायक पहल सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छात्रसंघ चुनावों के आयोजन से प्रदेश के युवाओं को अपनी नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में लोकतांत्रिक वातावरण और अधिक सुदृढ़ होगा।

उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि युवाओं की नेतृत्व क्षमता, लोकतांत्रिक समझ और भविष्य की जिम्मेदारियों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। लोकतंत्र केवल संसद, विधानसभा अथवा सचिवालय तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी वास्तविक नींव वहीं से मजबूत होती है जहाँ युवा पहली बार अपने विचार व्यक्त करना, सहमति-असहमति दर्ज कराना तथा अपने प्रतिनिधियों का लोकतांत्रिक तरीके से चयन करना सीखता है। महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय इस लोकतांत्रिक प्रशिक्षण के सबसे महत्वपूर्ण मंच हैं।

 दवे ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव स्थगित थे। लगभग आठ वर्षों के अंतराल के बाद इनके पुनः प्रारंभ होने से छात्रों की समाज एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी बढ़ेगी, लोकतांत्रिक चेतना मजबूत होगी तथा नए, सक्षम एवं उत्तरदायी युवा नेतृत्व को उभरने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की कि राज्य में लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं को पूर्णतः लागू करते हुए प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं। इससे योग्य, सक्षम, लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाला तथा छात्र हितों के प्रति प्रतिबद्ध युवा नेतृत्व स्वाभाविक रूप से उभरकर सामने आएगा।

 वर्तमान में महाविद्यालय विश्वविद्यालय में शैक्षणिक स्थिति पर छात्र मौन है है निश्चित छात्र संघ चुनाव से चुनाव जीतकर जो नेतृत्व आएगा वह शैक्षिक समस्याओं को लेकर मुखर होगा 

उल्लेखनीय है कि  सचिन दवे जाने-माने शिक्षाविद, प्रख्यात छात्रनेता, पीजी कॉलेज धार के पूर्व छात्रसंघ सीनेट सेक्रेटरी तथा सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व कार्यपरिषद सदस्य रहे हैं। वे पिछले 26 वर्षों से शिक्षा एवं छात्र हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।