भोपाल में ई-बस कर्मचारियों को सुरक्षित ड्राइविंग और यात्री व्यवहार का प्रशिक्षण, महिलाओं-बुजुर्गों की सहायता पर जोर

भोपाल 
 अरे भाई… जल्दी चढ़ो, आगे बढ़ो, इतनी देर क्यों लगा रहे हो?… सिटी बसों में यात्रियों और ड्राइवर-कंडक्टर के बीच ऐसी नोकझोंक आम बात रही है। लेकिन पीएम ई-बस सेवा के साथ इस छवि को बदलने की कोशिश शुरू हो गई है।

अब बस का ड्राइवर सिर्फ वाहन नहीं चलाएगा, बल्कि ‘कोच कैप्टन’ कहलाएगा और कंडक्टर की पहचान ‘डिजिटल असिस्टेंट’ के रूप में मिलने के साथ ही उन्हें व्यवहार कुशलता का प्रशिक्षण भी दिया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि स्टीयरिंग संभालने से पहले ड्राइवरों को एआई आधारित ड्राइविंग सिम्युलेटर की परीक्षा पास करनी पड़ रही है।

राजधानी में फिलहाल 20 ई-बसें चल रही हैं। इनके लिए भर्ती किए गए कोच कैप्टन और डिजिटल असिस्टेंट को सड़क पर उतारने से पहले कई चरणों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

ट्रैनिंग में फेल हुए तो बाहर
आवेदन की स्क्रीनिंग, मेडिकल जांच, फिजिकल फिटनेस और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद शुरू हुई ट्रेनिंग में सिर्फ ड्राइविंग नहीं, बल्कि व्यवहार भी परीक्षा का हिस्सा बना।

कई अभ्यर्थी ट्रेनिंग के दौरान तय मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें बाहर कर दिया गया। ड्राइवरों को सिम्युलेटर पर ऐसी परिस्थितियों में बस चलानी पड़ी, जो रोजमर्रा की सड़क पर कभी भी सामने आ सकती हैं।

इसमें कोहरा, बारिश, अचानक सामने आया वाहन, ब्रेक फेल, भीड़भाड़ वाला चौराहा और रात का ट्रैफिक जैसी हर स्थिति में उनके फैसले और प्रतिक्रिया का आकलन किया गया। बस को ऊर्जा दक्ष तरीके से चलाने, बैटरी बचाने और अचानक ब्रेक से बचने का भी अभ्यास कराया गया।

व्यवहार भी बना परीक्षा का हिस्सा
बीसीएलएल ने पहली बार ड्राइवर और कंडक्टर के व्यवहार को भी ट्रेनिंग का अहम हिस्सा बनाया। उन्हें सिखाया गया कि हर यात्री का अभिवादन करना है, बुजुर्ग, दिव्यांग और महिलाओं की मदद करनी है, गुस्से में आए यात्री से बहस नहीं, बल्कि संवाद करना है।

डिजिटल असिस्टेंट को इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन, ऑनलाइन भुगतान, फायर सेफ्टी, प्राथमिक उपचार और आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने का भी प्रशिक्षण दिया गया।

अधिकारियों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बसों की संख्या नहीं, बल्कि सेवा का अनुभव है। यदि चालक सुरक्षित ड्राइविंग करे, डिजिटल असिस्टेंट सम्मानजनक व्यवहार करे और बस समय पर पहुंचे, तभी लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे।

    ई-बस सेवा में यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सम्मानजनक व्यवहार हमारी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से कोच कैप्टन और डिजिटल असिस्टेंट को एआई आधारित सिम्युलेटर, सुरक्षित ड्राइविंग, डिजिटल टिकटिंग और यात्री व्यवहार का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि उन्हें बेहतर सार्वजनिक परिवहन अनुभव मिल सके।- अंजू अरुण कुमार, सीईओ, बीसीएलएल

 

Rupesh Jha

Recent Posts

दुर्लभ पैंगोलिन तस्करी मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज

भोपाल  दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव पैंगोलिन के अवैध शिकार, उसके शल्कों की तस्करी एवं अवैध…

2 hours ago

इंदौर को गंदे पानी से मिलेगी राहत, ₹1214 करोड़ की सीवरेज परियोजना को मिली रफ्तार

इंदौर इंदौर शहर में गंदे पानी की समस्या से राहत दिलाने के लिए नगर निगम…

2 hours ago

फेसलेस रजिस्ट्री का नया नियम लागू, अब नहीं अटकेगा रजिस्ट्री का काम; जानें आम लोगों को क्या होगा फायदा

भोपाल  मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए सरकार ने…

2 hours ago

PM Kisan 24th Installment: इन किसानों को मिलेंगे ₹4,000, किस्त से पहले तुरंत पूरा करें यह जरूरी काम

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के…

2 hours ago

15 अगस्त को अंधेरे से मिलेगी आजादी, चीन सीमा से 35 KM दूर बसे भारतीय गांवों में पहुंचेगी बिजली

पिथौरागढ़ देश जब 15 अगस्त को आजादी का पर्व मना रहा होगा, तब भारत-चीन सीमा…

2 hours ago

इस्लामिक NATO’ की नई चर्चा, पाकिस्तान ने दो मुस्लिम देशों को साथ लाया; क्या भारत के लिए बढ़ेगा खतरा?

नई दिल्ली इस्लामिक नाटो का मंच सजकर तैयार हो गया है। पश्चिमी देशों के सैन्य…

2 hours ago