पश्चिम बंगाल सरकार ने जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच जारी किए गए सभी जन्म प्रमाणपत्रों की जांच कराने का फैसला किया है। मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने अधिकारियों को ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से जारी प्रमाणपत्रों की वैधता की पड़ताल करने के निर्देश दिए हैं। सरकार के अनुसार, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सामने आए कथित फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के बाद यह कदम उठाया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जांच की जिम्मेदारी बीडीओ और शहरी क्षेत्रों में एसडीओ को दी गई है। जरूरत पड़ने पर वे जांच के लिए टीम गठित कर सकेंगे। खासतौर पर देरी से पंजीकृत किए गए जन्म प्रमाणपत्रों की जांच पर जोर रहेगा। अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि प्रमाणपत्र जारी करते समय जरूरी दस्तावेजों की जांच की गई थी या नहीं और निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
जांच से जुड़ी सभी जानकारी जन्म-मृत्यु सूचना पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। प्रत्येक प्रमाणपत्र को असली, फर्जी या त्रुटिपूर्ण के रूप में वर्गीकृत कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारी के पास वैधानिक अधिकार था या नहीं। सरकार ने सितंबर तक जांच पूरी करने का लक्ष्य तय किया है। जांच टीम में डिप्टी मजिस्ट्रेट या डिप्टी कलेक्टर से नीचे के अधिकारी शामिल नहीं किए जा सकेंगे।
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