कुंभ, कांवड़ मेला और चारधाम यात्रा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं और संक्रामक रोगों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए हरिद्वार में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की अत्याधुनिक शाखा स्थापित की जाएगी। धामी सरकार ने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज की 65 एकड़ भूमि में से एक एकड़ जमीन 99 साल की लीज पर एनसीडीसी को आवंटित कर दी है। शासन की ओर से इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।
करीब तीन सप्ताह पहले कैबिनेट बैठक में एनसीडीसी केंद्र की स्थापना के लिए भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी करते हुए आदेश जारी किया। सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है।
बड़े आयोजनों में संक्रामक रोगों की निगरानी होगी मजबूत
हरिद्वार में एनसीडीसी केंद्र स्थापित होने से प्रदेश में संक्रामक और महामारीजनित रोगों की जांच और निगरानी क्षमता बढ़ेगी। चारधाम यात्रा, कांवड़ मेला और कुंभ जैसे आयोजनों में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू, डेंगू, मंकीपॉक्स, कोरोना और अज्ञात वायरल बुखार जैसी बीमारियों के संक्रमण का खतरा बना रहता है।
एनसीडीसी केंद्र के माध्यम से ऐसे संक्रमण की समय रहते पहचान और निगरानी की जा सकेगी। बीमारी के मामलों का पता चलने के बाद संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम भी तेजी से उठाए जा सकेंगे।
नए वायरस और बैक्टीरिया की भी हो सकेगी पहचान
हरिद्वार में एनसीडीसी केंद्र बनने के बाद नए वायरस और बैक्टीरिया की पहचान के साथ संक्रामक रोगों की निगरानी व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बड़े आयोजनों के दौरान जलजनित और वायुजनित बीमारियों की रियल टाइम सर्विलांस और मॉनिटरिंग को भी बेहतर किया जा सकेगा।
इससे किसी संक्रमण के सामने आने पर उसके प्रसार की स्थिति का आकलन करने और समय रहते आवश्यक स्वास्थ्य उपाय करने में मदद मिलेगी।
दिल्ली और पुणे की लैब पर निर्भरता होगी कम
वर्तमान में गंभीर संक्रमण या अज्ञात बीमारी से जुड़े नमूनों की उच्चस्तरीय जांच और जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए प्रदेश को दिल्ली और पुणे स्थित प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। नमूने भेजने और रिपोर्ट मिलने में समय लगने के कारण बीमारी की पहचान और उपचार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
हरिद्वार में आधुनिक बायो-सेफ्टी लैब स्थापित होने से कई महत्वपूर्ण जांच प्रदेश में ही किए जाने की सुविधा मिल सकेगी। इससे जांच रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय कम होने और संक्रमण की पहचान तेजी से होने की उम्मीद है।
वन्यजीवों से फैलने वाली बीमारियों पर भी होगा शोध
उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से घिरा है। ऐसे में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। एनसीडीसी केंद्र के माध्यम से स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस और रेबीज समेत अन्य बीमारियों पर शोध और निगरानी की जा सकेगी।
मेडिकल छात्रों और शोधकर्ताओं को मिलेगा प्रशिक्षण
राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार के परिसर में एनसीडीसी केंद्र स्थापित होने से मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को भी लाभ मिलेगा। महामारी विज्ञान, वायरोलॉजी और पब्लिक हेल्थ सर्विलांस के क्षेत्र में आधुनिक प्रशिक्षण और शोध के अवसर उपलब्ध होंगे।
केंद्र की स्थापना से उत्तराखंड में संक्रामक रोगों की निगरानी, जांच, शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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