young farmer leaders: युवा किसान नेताओं को राकेश टिकैत का कड़ा संदेशyoung farmer leaders: युवा किसान नेताओं को राकेश टिकैत का कड़ा संदेश

young farmer leaders: युवा किसान नेताओं को राकेश टिकैत का कड़ा संदेश

 

भारतीय किसान यूनियन की ओर से आयोजित युवा कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन के दौरान संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने युवाओं और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया। एक बैंकट हॉल में चल रहे इस सम्मेलन में राकेश टिकैत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके भाषण और मीडिया से बातचीत के दौरान संगठन के भीतर चल रही कार्यशैली, धरना-प्रदर्शन की प्रवृत्ति, अनुशासन और युवाओं की भूमिका को लेकर कई अहम बातें सामने आईं।

राकेश टिकैत ने सबसे पहले संगठन के नाम पर हो रहे तीन-तीन घंटे के धरनों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आजकल हर छोटी बात पर लोग यह कहने लगते हैं कि वे धरना दे रहे हैं, जबकि कुछ घंटे बैठकर उठ जाना धरना नहीं होता। टिकैत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धरना, प्रदर्शन, पंचायत, महापंचायत और बैठक—ये सभी अलग-अलग शब्द हैं और इनका मतलब भी अलग-अलग होता है। उन्होंने कहा कि धरना किसी भी आंदोलन का आखिरी विकल्प होता है, जिसमें बोरिया-बिस्तर बांधकर घर से निकलना पड़ता है और जब तक मांग पूरी न हो जाए, तब तक वहीं डटे रहना होता है।

राकेश टिकैत ने संगठन में धरनों को लेकर नया नियम भी सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि अब अगर कोई कार्यकर्ता धरना देगा तो उसे कम से कम 72 घंटे तक धरने पर बैठना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इस दौरान समस्या का समाधान हो भी जाए, तब भी धरना देने वाला व्यक्ति तुरंत घर नहीं जाएगा। टिकैत ने कहा कि यह नियम केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि संगठन के सभी कार्यकर्ताओं पर समान रूप से लागू होगा। उनका कहना था कि इससे धरनों की गंभीरता बनी रहेगी और संगठन के नाम का दुरुपयोग नहीं होगा।

मीडिया से बातचीत में राकेश टिकैत ने कहा कि संगठन के धरना-प्रदर्शनों में सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका युवा वर्ग की रहती है। हालांकि कई बार जोश में आकर युवा कार्यकर्ता संगठनात्मक मर्यादाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय किसान यूनियन ने 35 वर्ष से कम उम्र के कार्यकर्ताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। टिकैत ने बताया कि इस ट्रेनिंग के जरिए युवाओं को संगठन के नियम, आंदोलन की रणनीति, नेतृत्व की जिम्मेदारियां और अनुशासन का महत्व समझाया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि युवा ऊर्जा संगठन की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन अगर यह ऊर्जा अनुशासन के बिना काम करेगी तो यह ताकत संगठन को नुकसान भी पहुंचा सकती है। ट्रेनिंग के दौरान कार्यकर्ताओं के व्यवहार, गतिविधियों और जिम्मेदारियों की समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संगठन में छंटनी करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। टिकैत ने साफ किया कि संगठन में केवल वही लोग रहेंगे जो उसकी विचारधारा और अनुशासन को समझते और मानते हैं।

सम्मेलन के दौरान राकेश टिकैत ने नशे के खिलाफ अभियान को लेकर भी सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन में गुटखा और नशे के खिलाफ पहले से ही अभियान चलाया जा रहा है। जो भी कार्यकर्ता नशा करता पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। टिकैत ने कहा कि गुटखे पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, लेकिन अब नशे के अन्य रूपों के खिलाफ इसे एक संगठित अभियान के तौर पर आगे बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि नशा न केवल व्यक्ति को कमजोर करता है, बल्कि संगठन की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है।

राकेश टिकैत ने सम्मेलन में केवल संगठनात्मक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय और क्षेत्रीय समस्याओं पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चिमनियों से निकलने वाले धुएं, गांवों में दूषित पेयजल, नालों की सफाई और सड़कों पर जलभराव जैसी समस्याओं पर नजर रखें। उन्होंने कहा कि किसान यूनियन केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित संगठन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समाज से जुड़ी हर समस्या पर आवाज उठाने का माध्यम है।

टिकैत ने यह भी कहा कि भारतीय किसान यूनियन के नाम का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए। संगठन के नाम पर अगर कोई गलत गतिविधि होती है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की छवि खराब करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि संगठन की पहचान वर्षों की संघर्ष यात्रा से बनी है और उसे हल्के में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।

युवा कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन के दौरान राकेश टिकैत का यह सख्त और अनुशासनात्मक संदेश संगठन के भीतर एक नए बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनके बयान यह दर्शाते हैं कि भारतीय किसान यूनियन अब केवल आंदोलन की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि संगठनात्मक मजबूती, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी समान रूप से जोर देना चाहती है।