राजस्थान के टोंक में आयोजित जिला कांग्रेस कमेटी की SIR कार्यशाला में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और टोंक विधायक सचिन पायलट ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि केवल उनके आगे–पीछे घूमे, साफा पहनाने या फोटो खिंचवाने से किसी को टिकट नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि आगामी निकाय और पंचायत चुनावों में टिकट चाहिए तो ढोल-मालाओं से दूर रहकर SIR के तहत गली-मोहल्लों में वास्तविक संगठनात्मक काम करना होगा। अपने संबोधन में पायलट ने कहा कि SIR अभियान पार्टी के लिए परीक्षा की घड़ी है और उसका उद्देश्य यह देखना है कि कहीं कांग्रेस का वोट सुनियोजित तरीके से चोरी तो नहीं किया जा रहा।
सचिन पायलट ने साफ कहा कि अब फोटोशूट का समय बीत चुका है, काम करके दिखाना होगा। पायलट ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो कार्यकर्ता संगठन की मंशा के अनुरूप काम नहीं करेंगे, उन्हें टिकट का “मेवा” नहीं मिलेगा। ”आगे आने वाले समय मे पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव में टिकिट लेना है तो मेरे आगे-पीछे घूमना, साफे पहनाना और फ़ोटो खींचना छोड़कर फील्ड में काम करें। ढोल और मालायें छोड़ कर एसआईआर का काम करते हुए पार्टी को मजबूत करें।”
पायलट ने एसआईआर को एक अच्छी प्रक्रिया बताया लेकिन साथ ही मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव से पहले लाखों नाम गायब होना चुनाव आयोग की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। पायलट ने केंद्र सरकार पर चुनाव आयोग के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख बनाए रखना बेहद जरूरी है। कार्यशाला के दौरान पायलट ने घोषणा की कि वे स्वयं अपने विधानसभा क्षेत्र के BLA के काम का मूल्यांकन करेंगे और देखेंगे कि किसने ईमानदारी से मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम किया और कौन लापरवाह रहा।
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी ने कई राज्यों की मतदाता सूचियों की जांच करवाकर उनमें त्रुटियों को उजागर किया है। ये त्रुटियां अनजाने में नहीं हुई है, ये जान-बूझकर साजिशन की गई गलतियां हैं। NDA की सरकार ने बिहार में चलते चुनाव के बीच प्रत्येक महिला के खाते में 10-10 हजार रुपए डालने का काम किया और चुनाव आयोग मूकदर्शक बनकर बैठा रहा।
