संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान पर कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ा दिया है। खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच यूएई ने पाकिस्तान से अपना अरबों डॉलर जल्द लौटाने को कहा है, जिसके तहत इस महीने 3.5 अरब डॉलर की बड़ी रकम चुकानी होगी।
बताए कि, यह कर्ज 2018 से लगातार रोलओवर होता आ रहा था, यानी उसकी अवधि बढ़ाई जाती रही थी, लेकिन इस बार पाकिस्तान यूएई के साथ 3 अरब डॉलर के कर्ज को आगे बढ़ाने के लिए समझौता नहीं कर पाया। साथ ही, करीब 45 करोड़ डॉलर का एक और पुराना कर्ज भी यूएई ने वापस मांग लिया है, जिससे पाकिस्तान पर वित्तीय दबाव और बढ़ गया है।
वहीं, अब तक पाकिस्तान इस कर्ज पर लगभग 6% सालाना ब्याज देता रहा है, लेकिन अब इसे मासिक आधार पर वसूला जा रहा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, 23 अप्रैल तक यह भुगतान किया जाना है, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 18% है। इससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा संतुलन और उसकी करेंसी पर असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। स्टेट बैंक के अनुसार, मार्च के अंत तक पाकिस्तान के पास 16.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो करीब तीन महीने के आयात के लिए ही पर्याप्त है।
यूएई द्वारा अचानक कर्ज वापसी की मांग के पीछे की वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में इसे मध्य-पूर्व के मौजूदा हालात और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के तनाव से जोड़ा जा रहा है।
हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रिया बताया है और दोनों देशों के बीच किसी तरह के राजनीतिक मतभेद से इनकार किया है, जबकि स्थानीय मीडिया का कहना है कि कर्ज रोलओवर को लेकर बातचीत सफल नहीं हो सकी।
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