UGC के नए नियमों का BJP में क्यों हो रहा विरोध?

देश में एक मामला बहुत तेजी से फैल रहा है और इसकी जड़े सीधी सीधी जुड़ी है शिक्षा पाने वाली हजारों विद्यार्थियों से….मामला है एक नया नियम लागू होने का…नियम के लागू होते ही इसपर एक के एक आरोप लगते हुए नजर आ रहे है…जिससे सियासत गरमा गई है.. अब आइए आपको बता दें कि आखिर मामला है क्या….शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने और समानता को बढ़ावा देने के मकसद से UGC ने ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026’ के रूप में नये नियम लागू किए…और ये नियम इस तर्ज पर लागू किए गए कि यूजीसी के नए नियम सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होंगे…लेकिन यहां इसका बिल्कुल उलट होता हुआ दिखाई दे रहा है….नए नियम के पक्ष में तो नहीं लेकिन विरोध के सुर तेजी से उठने लगे हैं…. खासकर अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों और प्रभावशाली नेताओं ने इस लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
यूजीसी के नए नियमों को लेकर बवाल इतना बढ़ गया है कि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया….सवर्ण जाति संगठनों ने आंदोलन तेज करने की धमकी दे डाली है…इतना ही नहीं बीजेपी में भी इस नए नियम को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है. कई मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है…..लेकिन यहां एक बात महत्वपूर्ण ये है कि विपक्ष इस पर अब तक चुप्पी बनाए बैठा है….

यूजीसी के नए नियम को लेकर बीजेपी के अंदर से ही विरोध उठने लगे हैं. बीजेपी के दिग्गज नेता बृजभूषण शरण सिंह के विधायक बेटे प्रतीक भूषण ने बिना नाम लिए यूजीसी के नियमों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिन्हित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है.
वही बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि मोदी है तो मुमकिन है. विश्वास रखिए यूजीसी के नोटिफिकेशन की सभी भ्रान्तियों को दूर किया जाएगा…..इंतज़ार कीजिए यूजीसी की भ्रांतियां भी ख़त्म होगी……
यूजीसी से जुड़े एक सवाल पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सवर्ण समाज नाराज नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य किसी वर्ग को पीछे करना नहीं, बल्कि उन तबकों को आगे बढ़ाना है जो ऐतिहासिक रूप से विकास की दौड़ में पिछड़ गए हैं. उनका कहना था कि सामाजिक न्याय की प्रक्रिया में संतुलन आवश्यक है और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है. केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जो लोग पीछे छूट गए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. इसमें किसी समाज के साथ अन्याय नहीं हो रहा है.
अब सवाल ये उठ रहा है कि बीजेपी नेता क्यो बेचैन नजर आ रहै है…..तो आइए समझते है…
यूजीसी के इस नियम लागू होने के बाद अगड़ी जाति के लोग नाराज बताए जा रहे हैं. मौजूदा समय में अगड़ी जाति के मतदाता बीजेपी का कोर वोटबैंक माना जाता है. यूजीसी के नए नियम को लेकर विरोध के सुर भी अगड़ी जाति के द्वारा उठाए जा रही है. अगड़ी जाति के तहत आने वाले ठाकुर से लेकर ब्राह्मण और कायस्थ समुदाय से जुड़े संगठन अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर रहे हैं. नियम को वापस लेने की जिद पर अड़े हैं, उन्हें लगता है कि इस नियम के लागू होन से उनके बच्चों का भविष्य बर्बाद हो सकता है.

अगड़ी जातियों की नाराजगी को देखते हुए बीजेपी के भी कई नेता असमंजस में हैं. ऐसे में कई नेता खुलकर तो कुछ नेता दबी जुबान से विरोध कर रहे हैं. इसके पीछे असल वजह यह है कि अगड़ी जातियों को लग रहा है कि पूरी सियासत दलित और ओबीसी के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है और अगड़ी जातियों उनके सियासी एजेंडे से बाहर हो रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेताओं को लग रहा है कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ उठ रही आवाज पर चुप रहते हैं तो उनकी सियासत खत्म हो सकती है, क्योंकि यह मुद्दा काफी गर्मा गया है.

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