सहज, शान्त, प्रसन्न और स्वाभाविक रहें
सहज, शान्त, प्रसन्न और स्वाभाविक रहें
सहज, शान्त, प्रसन्न और स्वाभाविक रहें
भगवान आपसे केवल यही चाहता है
कार्य सफलता के लिए पाँच साधन हैं
"प्रत्येक प्राप्त वस्तु और पदार्थ के प्रति प्रासादिक भाव रखें; यह ईश्वरीय कृपा और अनुग्रह ही है।"
उधार वापस ना दें
एक दिवसीय युवा चेतना शिविर - गीता ज्ञान संस्थानम्, कुरुक्षेत्र
"सेवा हि परमो धर्म: !"
सबसे बढ़िया काम- ब्याज पर पैसे देना!
रात्रि विश्राम से पूर्व ऐसा क्या करें - जिससे प्रभु का स्मरण और अधिक बने
जानिये !! हमारी दिनचर्या कैसी हो? युवाओं के लिए दिव्य सन्देश