UP: देवरिया में तैनात पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन का बयानUP: देवरिया में तैनात पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन का बयान

UP: देवरिया में तैनात पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन का बयान

उत्तर प्रदेश के देवरिया में तैनात पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे छात्रों के बीच भाषण देते हुए फ़िल्मी किरदारों के असर पर खुलकर अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन में ‘पुष्पा’, ‘केजीएफ’ और अन्य फिल्मों के नकारात्मक किरदारों का उदाहरण देते हुए यह चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति इन फिल्मों के नकारात्मक प्रभाव में आकर गुंडागर्दी करता है, तो पुलिस उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।

वीडियो में एसपी संजीव सुमन कहते हैं कि यदि ‘पुष्पा’ जैसे किरदार उनके सामने या पुलिस के सामने आए — ऐसे लोग जो खुद को फ़िल्मी हीरो समझकर कानून तोड़ने की सोचते हैं — तो उन्हें लाठी से पीटकर ठीक कर दिया जाएगा।

उनके अनुसार, आजकल सिनेमा की वजह से एक गलत धारणा बन रही है जिसमें फिल्मों के विलेन, नकारात्मक रोल और एंटी-हीरो बने किरदारों को समाज का एक तबका हीरो की तरह देखने लगा है। उन्होंने कहा कि ‘केजीएफ’ के रॉकी भाई हों या अन्य फिल्मों के डॉन और विलेन, इन सभी निगेटिव कैरेक्टर्स को मीडिया और सोशल मीडिया ने ऐसा प्रस्तुत किया है जैसे वे समाज में आदर्श हों।

एसपी के अनुसार, विडंबना यह है कि बड़े-बड़े अभिनेता भी अब नकारात्मक भूमिकाएँ करने में हिचक नहीं रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि आज के युवाओं को ऐसा कंटेंट ज्यादा पसंद आता है। उनका मानना है कि फिल्मों और सोशल मीडिया का यह प्रभाव युवाओं के वास्तविक जीवन पर गहरा असर डाल रहा है।

उन्होंने मंच से यह भी कहा कि जो बच्चा पढ़ाई-लिखाई में अच्छा होता है, जो कल के समाज और देश की रीढ़ बन सकता है, उसे फिल्मों में अक्सर एक कमजोर और डरपोक किरदार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। वहीं, सिगरेट पीने वाले, सड़क पर घूमने वाले और गुंडागर्दी करने वाले लड़कों को एक स्टाइलिश हीरो के रूप में दिखाया जाता है। यह कहीं न कहीं बच्चों के मन में गलत संदेश छोड़ रहा है।

मणिनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज में आयोजित श्रीमणिनाथ ब्रह्म जयंती के 56वें समारोह में पहुंचकर एसपी संजीव सुमन ने छात्रों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन के लिए है, असल जिंदगी उससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे फिल्मों और सोशल मीडिया में दिखने वाली अवास्तविक छवियों से बचें और अपने जीवन की राह खुद चुनें। उनका कहना था कि सकारात्मक सोच और अध्यात्म की ओर झुकाव जीवन को बेहतर दिशा दे सकता है।

संजेव सुमन सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि अपने संघर्षों की मिसाल भी हैं। बिहार के खगड़िया जिले में जन्मे संजीव सुमन सामान्य परिवार से आते हैं। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा हासिल की। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन इतनी मजबूत थी कि वे आईआईटी रुड़की तक पहुंचे और कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा पास कर 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी बने।

उनकी पहली नियुक्ति 2016 में बागपत में एएसपी के रूप में हुई। इसके बाद 2018 में वे कानपुर में एडिशनल एसपी वेस्ट के पद पर भेजे गए, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में अपनी कार्यशैली से लोगों और विभाग का ध्यान खींचा। 2019 में उन्हें पहली बार किसी जिले का पुलिस अधीक्षक बनाया गया और उन्हें बागपत की कमान सौंपी गई।

इसके बाद 2020 में उनकी तैनाती लखनऊ के डीएसपी ईस्ट के रूप में हुई। 2021 में वे लखीमपुर खीरी स्थानांतरित किए गए। जनवरी 2024 में उनका ट्रांसफर अलीगढ़ हो गया। अलीगढ़ में उनकी छवि एक कड़े और निष्पक्ष पुलिस अधिकारी के रूप में और भी मजबूत हुई। मॉब लिंचिंग के एक मामले में उन्होंने बिना किसी दबाव के कार्रवाई की, जिसके कारण वे काफी चर्चा में आए।

हिंदू महासभा के एक प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बनने पर वे मौके पर पहुंचे और साफ तौर पर कहा कि चाहे कोई भी हो, कानून से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।