रायपुर: छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा है कि भारत में कृषि के क्षेत्र में नवाचार एवं स्टार्टअप स्थापित करने की सर्वाधिक संभावनाएं हैं। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है जिनके मन में कुछ नया करने का जूनून है। इन युवाओं को कृषि के क्षेत्र में उपलब्ध असीमित संभावनाओं को तलाश कर अपने नवाचारी विचारों के साथ स्टार्टअप स्थापित करने के लिए आगे आना चाहिए और एक नई सोच के साथ देश के विकास को नई गति प्रदान करना चाहिए।
श्री नेताम ने कहा कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार स्टार्टअप इंडिया एवं स्किल इंडिया जैसी अभिनव योजनाओं के माध्यम से नवाचार एवं स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी निपुण जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं को स्टार्टअप एवं लघु मध्यम उद्योग स्थापित करने हेतु प्रेरित कर रही है। कृषि मंत्री श्री नेताम आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि मंडपम में 28 से 30 सितम्बर तक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के सहयोग से आयोजित “छत्तीसगढ़ यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव 2026” के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

श्री नेताम ने यूथ कॉन्क्लेव 2026 के भव्य एवं सफल आयोजन के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं उनकी पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समापन समारोह में रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी एवं संचालक कृषि श्री राहुल देव भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। समारोह की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। कृषि मंत्री श्री नेताम ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का अवलोकन भी किया तथा वहां उपलब्ध अधोसंरचनाओं एवं सुविधाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर यूथ कॉन्क्लेव में सर्वश्रेष्ठ नवाचारी विचार प्रस्तुत करने वाले तीन स्टार्टअप्स को क्रमशः एक लाख रूपये, पचहत्तर हजार रूपये एवं पचास हजार रूपये के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद रायपुर श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा युवाओं को नवाचारी व्यवसाय तथा स्टार्टअप्स शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। नवचारी विचारों के साथ आगे आने वाले युवाओं को स्टार्टअप्स स्थापित करने के लिए कई तरह सुविधाएं एवं अनुदान उपलब्ध कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में निहित व्यापक संभावनाओं को देखते हुए युवाओं को नौकरी के पीछे न भागते हुए नवीन प्रौद्योगिकी एवं नवाचारी विचारों के साथ नए कृषि आधारित स्टार्टअप्स स्थापित करने के लिए आगे आना चाहिए। इससे कृषि के साथ – साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि इस तीन दिवसीय कॉन्क्लेव में 1,200 से अधिक नवोन्मेषी युवा विद्यार्थी एवं नवाचारी उद्यमी शामिल हुए। इस मंच पर विद्यार्थी, युवा उद्यमी, स्टार्टअप्स, नवोन्मेषक, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि तथा विभिन्न संस्थाओ को एक साथ जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। कॉन्क्लेव में 24 स्टार्टअप्स अपने नवाचार, तकनीक और समाधानों का प्रदर्शन किया तथा उन्हें अपने विचारों और व्यावसायिक मॉडलों की पिचिंग का अवसर भी प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप पिचिंग सत्र में सर्वश्रेष्ठ नवाचारी विचार प्रस्तुत करने वाले तीन उद्यमियों को क्रमशः एक लाख पचहत्तर हजार पचास हजार रूपये राशि के पुरस्कार दिये जा रहे हैं।
डॉ. चंदेल ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला उद्यमी बनाने के लिए आवश्यक मेंटरशिप, निवेश, तकनीकी सहयोग, बौद्धिक संपदा संरक्षण, वित्तीय एवं बाजार संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक समग्र मंच तैयार करना है। समारोह को कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, संचालक कृषि श्री राहुल देव, भारत सरकार की संस्था बाइरेक नई दिल्ली की डिप्टी मैनेजर डॉ. दीक्षा राठौर एवं सीजीकॉस्ट रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अमित दुबे ने भी संबोधित किया। कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर यूथ कॉन्क्लेव 2026 के मुख्य आयोजन सचिव डॉ. वी.के. त्रिपाठी, आयोजन सचिव डॉ. हुलास पाठक, कुलसचिव डॉ. कपिलदेव दीपक सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठातागण, निदेशकगण, वैज्ञानिक एवं प्राध्यापक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं उपस्थित थे।
