देश में रसोई गैस से जुड़े नियमों में जल्द ही बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 जून से कुछ नए नियम लागू किए जा सकते हैं, जिनका सीधा असर LPG सिलेंडर और PNG (पाइप्ड गैस) कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इसका मकसद गैस सप्लाई को बेहतर बनाना और गलत इस्तेमाल को रोकना है।
PNG कनेक्शन बढ़े, लेकिन LPG की मांग कम नहीं हुई
पिछले कुछ समय में शहरों में PNG कनेक्शन तेजी से बढ़े हैं। मार्च तक करीब 6.5 लाख नए PNG कनेक्शन दिए गए। लेकिन इसके बावजूद LPG सिलेंडर की मांग में खास कमी नहीं आई है। इससे पता चलता है कि कई लोग दोनों गैस सिस्टम एक साथ इस्तेमाल कर रहे हैं।
एक ही घर में दो कनेक्शन पर सख्ती
नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी घर में PNG कनेक्शन उपलब्ध है, तो उस परिवार को LPG कनेक्शन छोड़ना पड़ सकता है। सरकार और गैस कंपनियां ऐसे घरों की पहचान कर रही हैं, जहां दोनों कनेक्शन चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि एक ही पते पर दोनों कनेक्शन रखना अब नियमों के खिलाफ माना जा सकता है। अगर किसी इलाके में PNG सुविधा उपलब्ध है और फिर भी LPG इस्तेमाल हो रहा है, तो सप्लाई रोकी या बंद भी की जा सकती है।
LPG बुकिंग और रिफिल पर भी बदलाव
अब उन इलाकों में जहां PNG पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां LPG सिलेंडर बुकिंग और रिफिल पर भी रोक लगाई जा सकती है। इसके लिए कंपनियों ने अपने डिजिटल सिस्टम को अपडेट कर लिया है ताकि सही जानकारी मिल सके। शहरी इलाकों में सिलेंडर की रिफिल का अंतर बढ़ाकर 25 दिन किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन तक हो सकती है
साल में सीमित सब्सिडी वाले सिलेंडर
सरकार की योजना के अनुसार, हर परिवार को साल में सिर्फ 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते रहेंगे। इसके बाद जितने भी सिलेंडर लिए जाएंगे, उनकी कीमत बाजार दर के हिसाब से देनी होगी।
LPG कनेक्शन नियमों में भी बदलाव
नए कनेक्शन लेने पर अब ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट और इंस्टॉलेशन चार्ज देना पड़ सकता है। इसमें रेगुलेटर, पाइप और सेटअप खर्च भी शामिल किया जाएगा।
क्या है सरकार का मकसद?
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य गैस सप्लाई को बेहतर बनाना, गलत इस्तेमाल रोकना और PNG को बढ़ावा देना है। साथ ही LPG की सप्लाई और वितरण को ज्यादा पारदर्शी और नियंत्रित किया जाएगा।
