Tension escalates again in Punjab Congress: पंजाब कांग्रेस में फिर बढ़ा तनावTension escalates again in Punjab Congress: पंजाब कांग्रेस में फिर बढ़ा तनाव

Tension escalates again in Punjab Congress: पंजाब कांग्रेस में फिर बढ़ा तनाव

पंजाब कांग्रेस एक बार फिर से आंतरिक तनाव और खींचतान की चपेट में नजर आ रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के कैबिनेट मंत्री रहे नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू की बयानबाजी ने पार्टी संगठन में नई हलचल पैदा कर दी है। लंबे समय से चले आ रहे विवाद को तब नया मोड़ मिला, जब डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू द्वारा प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं पर लगाए गए आरोपों की गूंज सीधे पार्टी हाईकमान तक पहुंच गई। पंजाब कांग्रेस ने इन बयानों से हो रहे नुकसान की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल को भेज दी है।

यह रिपोर्ट उन बयानों और गतिविधियों का विश्लेषण पेश करती है, जिनके चलते बीते कुछ वर्षों में पंजाब कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट में खासतौर पर डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के हालिया वक्तव्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि वे राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष मानती ही नहीं हैं और उन्हें ‘बेपरवाह, गैर-जिम्मेदार, नैतिक रूप से बेईमान और भ्रष्ट’ बताया था। इसी बयान के बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित किया, लेकिन विवाद बढ़ने के बजाय और तेज हो गया

रिपोर्ट में नवजोत सिंह सिद्धू की भी पिछले कई वर्षों की गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि सिद्धू दंपति ने न केवल पार्टी लाइन से हटकर बयान दिए, बल्कि कई बार पंजाब कांग्रेस नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ खुलकर बोलते रहे। रिपोर्ट का यह भी दावा है कि पिछले चार वर्षों में पार्टी के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में सिद्धू और उनकी पत्नी ने या तो हिस्सा नहीं लिया या फिर उनमें सक्रियता नहीं दिखाई। इससे पार्टी की एकजुटता को नुकसान पहुंचा और कार्यकर्ताओं के बीच भी भ्रम की स्थिति बनी रही।

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बिंदु 2022 के विधानसभा चुनावों से जुड़ा है। इसमें उस पत्र का भी जिक्र है जो उस वक्त के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने पार्टी आलाकमान को लिखा था। इस पत्र में बताया गया था कि चुनाव से ठीक पहले नवजोत सिंह सिद्धू और तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच जारी तकरार ने कांग्रेस के चुनावी अभियान को काफी नुकसान पहुंचाया। आपसी मतभेद और संगठन के भीतर की गुटबाजी ने उस समय पार्टी की हार को और भी गहरा किया था। अब वही पत्र पुनः संदर्भ के रूप में रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है, ताकि यह दिखाया जा सके कि सिद्धू दंपति का व्यवहार कोई नया विवाद नहीं है, बल्कि समय-समय पर पार्टी को राजनीतिक क्षति पहुंचाने वाला कारक बनता रहा है।

नवजोत कौर द्वारा सोशल मीडिया पर दिए गए बयानों ने हाल के दिनों में जिस तरह से हवा पकड़ी, उससे पार्टी को मजबूरन अनुशासनात्मक कदम उठाने पड़े। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व पर ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद की दौड़ को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर नेतृत्व का चयन योग्यता या जनाधार के आधार पर नहीं बल्कि धनबल के आधार पर होता है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री पद उसे मिलता है जो 500 करोड़ रुपये की ‘अटैची’ लेकर आता है। इस तरह के आरोपों ने न केवल पार्टी की साख को चोट पहुंचाई बल्कि राजनीतिक हलकों में भी सनसनी फैला दी।

रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सिद्धू दंपति के बयानों और गतिविधियों ने पार्टी की छवि को लगातार नुकसान पहुंचाया है और यह सिलसिला अगर यूं ही जारी रहा तो 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। पार्टी संगठन का यह भी मानना है कि सिद्धू लंबे समय से बागी तेवर अपनाए हुए हैं और उन्हें अनुशासन में रखना अत्यंत आवश्यक है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि अगर इस तरह की बयानबाजी जारी रही तो न केवल संगठनात्मक ढांचा कमजोर होगा, बल्कि वर्करों में भी असंतोष बढ़ेगा और विपक्ष को फायदा मिलेगा

पंजाब कांग्रेस के भीतर उभरते इन तनावपूर्ण हालातों ने एक बार फिर से इस तथ्य को उजागर कर दिया है कि संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व का सम्मान किसी भी पार्टी की सफलता के लिए आवश्यक है। पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस द्वारा पंजाब में किए गए निर्णयों की प्रक्रिया, नेतृत्व में बदलाव, गुटबाजी और आंतरिक संघर्ष ने पार्टी को कमजोर किया है। ऐसे में सिद्धू और उनकी पत्नी की ओर से लगातार दिए जा रहे बयानों ने पार्टी के भीतर एक और संकट पैदा कर दिया है।