हिमाचल: टीचर ने नंगा कर मासूम छात्र को पीटा
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। रोहड़ू ब्लॉक के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में हेड टीचर ने मासूम छात्र को इस कदर मारा कि देखने वालों की रूह कांप उठी।
इस घटना की एक वीडियो सामने आई है जिसमें देखा जा सकता है कि, एक बच्चा रो-रोकर रहम की भीख मांग रहा है, मगर टीचर के हाथ में कांटेदार झाड़ी है और चेहरा गुस्से से भरा हुआ।
घटना प्राथमिक विद्यालय गवाना की बताई जा रही है, जहां स्कूल की हेड टीचर रीना राठौर ने एक छात्र को कपड़े उतरवाकर पीटा। वीडियो में साफ दिखता है कि, बच्चा बिना कपड़ों के कांटेदार झाड़ियों की चोट खा रहा है और दर्द से चीख रहा है।
बावजूद इसके, टीचर का दिल नहीं पसीजा। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया। कुछ ही घंटों में ये वीडियो वायरल हो गया और पूरे हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। जैसे ही ये मामला अधिकारियों तक पहुंचा, शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई की।
डिप्टी डायरेक्टर ने हेड टीचर रीना राठौर को निलंबित कर दिया और उनका मुख्यालय प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय सराहन में निर्धारित किया गया। विभाग ने ये भी स्पष्ट किया है कि, इस तरह की किसी भी घटना को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस घटना ने ‘बच्चों को शारीरिक दंड से सुरक्षा’ से जुड़े आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 17 का खुला उल्लंघन किया है। इस कानून में ये स्पष्ट है कि, किसी भी शिक्षक द्वारा छात्र को शारीरिक या मानसिक रूप से दंडित करना गैर-कानूनी है और ऐसा करने वाले के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
साथ ही, ये आचरण केंद्रीय सिविल सेवा नियम, 1964 की धारा 3(1) का भी सीधा उल्लंघन है। जिसमें कहा गया है कि, सरकारी कर्मचारी को “मर्यादित, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार” करना चाहिए, खासकर जब बात बच्चों की शिक्षा से जुड़ी हो।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, “बच्चों के साथ किसी भी तरह की हिंसा, चाहे शारीरिक हो या मानसिक, को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में विभाग की नीति जीरो टॉलरेंस की है।”
अधिकारियों ने ये भी बताया कि, वीडियो में जो दृश्य सामने आए हैं, वे किसी भी शिक्षक के लिए शर्मनाक हैं। टीचर का ये व्यवहार न केवल शिक्षा व्यवस्था की साख पर प्रश्न उठाता है, बल्कि समाज के लिए भी चिंताजनक संदेश देता है।
घटना के बाद गांव में भी गुस्सा है। स्थानीय लोगों ने कहा कि जिस व्यक्ति को बच्चों को ज्ञान देना चाहिए, वे खुद हिंसा का पाठ पढ़ा रहा है। कई लोगों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया और मांग की कि ऐसी शिक्षिका को सिर्फ सस्पेंड नहीं, बल्कि बर्खास्त किया जाए।
ऐसे में ये बात भी लोगों के लिए चौंकाने वाली है कि, कोई भी इंसान उस समय बच्चे को बचाने नहीं आया। आखिर में वीडियो में टीचर खुद कहती है कि, “इसका वीडियो वायरल करेंगे।” शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि, वही वीडियो उनके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, जिस बच्चे की पिटाई की गई, वह गांव के ही एक गरीब परिवार से है। परिजनों ने बताया कि, बच्चे का पूरा शरीर खरोंचों से भर गया है और वे मानसिक रूप से भी डरा हुआ है। फिलहाल, शिक्षा विभाग की टीम बच्चे से मिलकर उसकी काउंसलिंग कर रही है ताकि वे इस सदमे से उबर सके।
बच्चे के पिता ने कहा कि,“हम नहीं चाहते कि किसी और बच्चे के साथ ऐसा हो। जो सजा मेरे बच्चे को मिली, वो किसी और को न मिले।” मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शिक्षा मंत्री ने भी जिला शिक्षा अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मंत्री ने कहा कि “शिक्षा एक पवित्र पेशा है। अगर कोई शिक्षक अपनी मर्यादा भूल जाए, तो ये समाज के लिए बड़ा खतरा है।” उन्होंने आगे कहा कि, बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्कूलों में जल्द ही “चाइल्ड सेफ्टी ऑडिट” कराया जाएगा।
शिमला की ये घटना एक चेतावनी है उन सभी के लिए जो “अनुशासन” के नाम पर बच्चों पर हिंसा को जायज ठहराते हैं। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मविश्वासी और संवेदनशील बनाना है।
और जब एक शिक्षक ही अमानवीयता की हद पार कर दे, तो समाज को यह सोचने की ज़रूरत है कि “कौन दे रहा है असली शिक्षा — किताबें या डर?”
Himachal: Teacher strips and beats innocent student

