RAJASTHAN NEWS : टीचर शराब पीकर पहुंचा स्कूल, बच्चों ने बुलाए परिजन
सीकर जिले के नीमकाथाना उपखंड के लादीकाबास गांव की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा का मंदिर शर्मसार होता नजर आया, जब एक अध्यापक शराब के नशे में स्कूल पहुंच गया। यह मामला शुक्रवार का है, जिसने पूरे गांव और शिक्षा विभाग को झकझोर कर रख दिया है।
जानकारी के अनुसार, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक अशोक मीणा शुक्रवार को शराब के नशे में स्कूल पहुंचा। नशे की हालत में उसकी गतिविधियां देखकर बच्चों ने इसकी सूचना अपने परिजनों को दी। सूचना मिलते ही गांव के कई लोग स्कूल परिसर में पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया।
ग्रामीणों ने जब अशोक मीणा से सवाल जवाब किए तो वह सही तरीके से जवाब भी नहीं दे सका। नशे की हालत में झूमते हुए वह ग्रामीणों के सामने हाथ जोड़कर और पैर पकड़कर माफी मांगता नजर आया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह पहला मामला नहीं है। शिक्षक अशोक मीणा पहले भी कई बार शराब के नशे में स्कूल आता रहा है। बच्चों और ग्रामीणों ने कई बार उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन उसने अपनी आदत नहीं छोड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसमें शराब के नशे में धुत टीचर की हालत साफ देखी जा सकती है। ग्रामीणों ने उसे स्कूल से बाहर निकाल दिया और इसकी शिकायत विद्यालय की प्रिंसिपल अंजू शर्मा को दी।
स्कूल प्रिंसिपल अंजू शर्मा ने कहा, “मेरी पोस्टिंग 1 जुलाई को ही इस स्कूल में हुई है, और फिलहाल मैं छुट्टी पर हूं। ग्रामीणों ने शिकायत दी है, जैसे ही मैं स्कूल लौटूंगी, इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं अजीतगढ़ के सीबीईओ (CBEO) मोहनलाल ने बताया कि इस मामले को लेकर उनके पास अब तक कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई है। यदि शिकायत मिलती है तो निश्चित रूप से नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में अनुशासन और शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार शिक्षा को लेकर विभिन्न योजनाएं और नवाचार ला रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे शिक्षक पूरे तंत्र की साख को गिरा रहे हैं।
गांववालों ने मांग की है कि शिक्षक अशोक मीणा को तत्काल निलंबित किया जाए और इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे स्कूल के बाहर धरना प्रदर्शन भी कर सकते हैं।
यह घटना सिर्फ एक गांव की नहीं बल्कि समूची शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है कि यदि ऐसे मामलों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो इसका खामियाजा भविष्य की पीढ़ियां भुगतेंगी।
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