मुण्डकोपनिषद् का यह मंत्र एक आत्मज्ञान की दीपशिखा है, जो साधक के भीतर के समस्त बन्धनों को जला देता है
श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् — “प्रभुश्री की लेखनी से” — 12 जुलाई, 2025 (शनिवार) भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः। क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन् दृष्टे…

