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भगवद्पादचार्य आद्य शंकराचार्य के अनुसार, ब्रह्म शब्दातीत, अव्यवहित और निर्गुण है

यह मंत्र आत्मा के उस प्रकाश की अनुभूति है, जो न भीतर है, न बाहर — वह सर्वत्र है

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् — “प्रभुश्री की लेखनी से” — 11 जुलाई, 2025 (शुक्रवार) “यः सर्वज्ञः सर्वविद् यस्यैष महिमा भुवि। दिव्ये ब्रह्मपुरे…