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Sukhbir Badal Attack: काौन है नारायण चौरा, कांग्रेस नेता का क्यों आया नाम?

अमृतसर में बुधवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर बादल पर गोली चलाने का प्रयास किया गया। यह घटना श्री हरमंदिर साहिब के पास हुई, जहां सुखबीर बादल श्री अकाल तख्त साहिब की तरफ से दी गई धार्मिक सजा को भुगतने के लिए स्वर्ण मंदिर के मेन गेट पर तैनात थे। इसी दौरान नारायण सिंह चौरा नामक व्यक्ति ने करीब आकर उन पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, सुखबीर बादल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी ने हमलावर को पकड़ लिया और गोली दीवार में लग गई, जिससे किसी प्रकार का कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

नारायण सिंह चौरा की पहचान हमलावर के रूप में हुई है, और वह डेरा बाबा नानक (गुरदासपुर) के चौरा गांव का निवासी है। आरोपी गर्मपंथी बताया जा रहा है और उसकी दल खालसा से भी कथित तौर पर संबंध हैं। उसकी गतिविधियों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वह पंजाब में धार्मिक और राजनीतिक तनाव बढ़ाने के लिए सक्रिय था।

नारायण चौरा का आपराधिक इतिहास

नारायण सिंह चौरा का जन्म 04 अप्रैल 1956 को चौरा गांव, डेरा बाबा नानक में हुआ था। वह गरमख्याली विचारधारा से जुड़ा था और कथित तौर पर गरमख्याली लिबरेशन फोर्स और अकाल फेडरेशन से भी संबंध रखता था।

चौरा को 28 फरवरी 2013 को तरनतारन के जलालाबाद गांव से गिरफ्तार किया गया था। इसके साथ ही उसके साथी सुखदेव सिंह और गुरिंदर सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने मोहाली के कुराली गांव में छापा मारा, जहां से हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा बरामद करने का दावा किया गया।

उस पर आठ मई 2010 को अमृतसर के सिविल लाइंस थाने में विस्फोटक अधिनियम के तहत एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा, वह अमृतसर, तरनतारन और रोपड़ जिलों में गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े मामलों में भी वांछित था।

आतंकी गतिविधियां और पाकिस्तान में अज्ञात समय

चौरा ने 1984 के आसपास पाकिस्तान में जाकर वहां के आतंकी नेटवर्क से जुड़ने की कोशिश की थी। वह आतंकवाद के शुरुआती चरण के दौरान पंजाब में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी करने में सहायक था। पाकिस्तान में रहते हुए उसने कथित तौर पर गुरिल्ला युद्ध और देशद्रोही साहित्य पर एक किताब लिखी थी।

इसके अतिरिक्त, चौरा बुड़ैल जेलब्रेक मामले में भी आरोपी था, जिसमें कुछ जेल बंदी आतंकवादी भागने में सफल हो गए थे। इसके बाद उसकी गतिविधियों पर पुलिस ने निगरानी बढ़ाई थी।

कांग्रेस नेता का नाम क्यों आया?

इस हमले के बाद, अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि नारायण चौरा का भाई, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर रंधावा का करीबी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह हमला कांग्रेस के किसी समर्थन से प्रेरित था। साथ ही, उन्होंने मान सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह घटना पंजाब सरकार की विफलता को दर्शाती है और इसकी न्यायिक जांच की आवश्यकता है।

दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटना को रोकने में पंजाब सरकार पूरी तरह नाकाम रही है, और यह स्पष्ट हो गया है कि पंजाब में धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने वाली ताकतें सक्रिय हैं।

समाजवादी पार्टी और अन्य नेताओं की निंदा

इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने भी घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद है कि सुखबीर बादल पर हत्या का प्रयास किया गया। उनका कहना था कि इस प्रकार की घटना से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और पंजाब की स्थिति को और भी जटिल बना सकती है।

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