सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए शुक्रवार का दिन राहत भरा साबित हुआ। लगातार ऊंचाई पर पहुंचने के बाद दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसके चलते सोना और चांदी दोनों के भाव फिसल गए।
शुक्रवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सोने और चांदी में तेज गिरावट देखने को मिली। एमसीएक्स पर सोना करीब 1400 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में लगभग 8000 रुपये प्रति किलोग्राम की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
इंडियन बुलियन मार्केट के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोना करीब 1,54,190 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,238 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने का भाव 1,15,643 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है। दूसरी तरफ चांदी भी फिसलकर करीब 2,54,950 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता है। बाजार में यह आशंका बढ़ी है कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। ऐसी स्थिति में निवेशकों का रुझान सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों से हटकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़ जाता है।
इसके अलावा डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रही है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी अपेक्षाकृत महंगे हो जाते हैं, जिससे इनकी मांग प्रभावित होती है और कीमतों में नरमी देखने को मिलती है।
एक अन्य महत्वपूर्ण कारण मुनाफावसूली को भी माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे थे। ऐसे में बड़े निवेशकों और फंड मैनेजरों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी, जिससे बाजार में दबाव बढ़ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया। वैश्विक बुलियन बाजार और COMEX में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की अगली नीतियों पर रहेगी, क्योंकि इन्हीं के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों की आगे की दिशा तय हो सकती है।
