State President: यूपी में BJP प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा में देरी !,State President: यूपी में BJP प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा में देरी !,

State President: यूपी में BJP प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा में देरी !

भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में देश के नौ राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों (State President) की घोषणा कर दी है। इनमें उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य शामिल हैं, लेकिन सबसे अधिक आबादी वाले और राजनीतिक दृष्टि से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश में अब भी नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा नहीं हो पाई है।

वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष(State President) भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है, लेकिन पार्टी अब तक उनके उत्तराधिकारी के नाम पर फैसला नहीं ले सकी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, समाजिक समीकरण, केंद्र और राज्य सरकार के साथ तालमेल, और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए मंथन का दौर जारी है

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की नजर 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव पर है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी द्वारा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को लेकर तैयार की जा रही रणनीति से मुकाबले के लिए भाजपा को भी जातीय और सामाजिक संतुलन साधने की ज़रूरत है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष(State President) के रूप में ऐसा चेहरा तलाशा जा रहा है, जो राज्य के हर अंचल, हर वर्ग और हर जातीय समूह में बीजेपी की पकड़ को मजबूत कर सके।

बीजेपी के लिए एक नाम धर्मपाल सिंह लोधी का उभरकर सामने आया है। वे साफ-सुथरी छवि के अनुभवी नेता हैं और लोधी समाज से आते हैं। बीजेपी लंबे समय से गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने में जुटी है और इस दिशा में धर्मपाल सिंह की नियुक्ति एक रणनीतिक कदम मानी जा सकती है। लोधी समाज को स्वर्गीय कल्याण सिंह से जोड़कर देखा जाता रहा है, जो यूपी की राजनीति में मजबूत ओबीसी चेहरा थे।

हालांकि चर्चा है कि, अगर धर्मपाल सिंह को प्रदेश अध्यक्ष (State President)बनाया जाता है तो राजवीर सिंह, जो कल्याण सिंह के पुत्र हैं, उनके असहज होने की संभावना है। ऐसे में बीजेपी किसी तरह की आंतरिक नाराजगी को टालना चाहती है।

प्रदेश अध्यक्ष(State President) पद के लिए एक और नाम स्वतंत्र देव सिंह का भी जोर पकड़ रहा है। वे पहले भी प्रदेश अध्यक्ष(State President) रह चुके हैं और उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है। वे पिछड़े वर्ग से आते हैं और पार्टी संगठन या सरकार दोनों के साथ तालमेल में भी सक्षम हैं। उनकी वापसी से पार्टी को संतुलन साधने में मदद मिल सकती है

भाजपा की रणनीति में दलित समुदाय की भागीदारी को और बढ़ावा देने की मंशा भी दिख रही है। इस संदर्भ में एक नाम रामशंकर कठेरिया का सामने आ रहा है। वो आगरा से सांसद हैं और दलित समुदाय में उनका प्रभाव है। अगर बीजेपी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष(State President) बनाती है तो ये एक मजबूत सामाजिक संदेश होगा कि, पार्टी दलित नेतृत्व को शीर्ष स्तर पर सम्मान दे रही है।

बीजेपी का तरीका ये होता है कि, प्रदेश अध्यक्ष(State President) के लिए सिर्फ एक नाम की घोषणा की जाती है, ताकि ये संदेश जाए कि, पार्टी ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है। इस एक नाम पर सहमति बनाने के लिए लंबा मंथन चल रहा है। पार्टी ऐसे नेता को आगे लाना चाहती है, जो योगी सरकार, संगठन और केंद्र के बीच सेतु का काम कर सके।

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष(State President) का नाम तय होने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के विकल्प पर भी फैसला किया जाएगा। ऐसे में उत्तर प्रदेश का फैसला राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा प्रभाव डालेगा।

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और भविष्य की चुनावी रणनीति का प्रतीक होता है। इसी वजह से पार्टी इस फैसले को हल्के में नहीं ले रही है। हालांकि अब सबकी निगाहें बीजेपी के उस एक नाम पर टिकी हैं, जो उत्तर प्रदेश में पार्टी की अगली रणनीति का चेहरा बनेगा।