SIR deadline: चुनाव आयोग कर सकता है SIR की डेडलाइन बढ़ाने पर विचारSIR deadline: चुनाव आयोग कर सकता है SIR की डेडलाइन बढ़ाने पर विचार

SIR deadline: चुनाव आयोग कर सकता है SIR की डेडलाइन बढ़ाने पर विचार

देशभर के कई राज्यों में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया आज अपनी निर्धारित अंतिम तारीख पर पहुंच गई है, लेकिन इस प्रक्रिया को और आगे बढ़ाने पर चुनाव आयोग गंभीरता से विचार कर रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग सिद्धांत रूप से उत्तर प्रदेश में एसआईआर की समयसीमा दो सप्ताह के लिए बढ़ाने को तैयार है। यही नहीं, आज दोपहर तक आयोग उत्तर प्रदेश समेत अन्य कई राज्यों में भी इस अवधि को बढ़ाने की आधिकारिक घोषणा कर सकता है।

अगर चुनाव आयोग समयसीमा को 14 दिनों के लिए बढ़ाता है, तो 11 दिसंबर को खत्म हो रही नाम जुड़वाने की आखिरी तारीख अब 25 दिसंबर तक के लिए बढ़ जाएगी। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो समय पर अपने फॉर्म नहीं भर सके हैं या जिनका सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश के साथ पश्चिम बंगाल में भी एसआईआर की समयसीमा बढ़ा सकता है। ज्ञात हो कि आयोग इससे पहले केरल के लिए अंतिम तारीख को 11 दिसंबर से बढ़ाकर 18 दिसंबर कर चुका है, जिसके बाद ही दूसरे राज्यों में भी तारीख बढ़ाने की मांग तेज हो गई थी

उत्तर प्रदेश में एसआईआर अभियान तेज़ी से चल रहा है, लेकिन अभी भी काफी काम बाकी है। यहां अब तक 90 प्रतिशत से ज्यादा फॉर्म बांटे जा चुके हैं, जबकि 80 फीसदी लोग फॉर्म भरकर जमा भी कर चुके हैं। हालांकि, शेष 10 से 20 प्रतिशत मतदाताओं का काम पूरा करने में और समय लग सकता है। चुनाव आयोग को यही आंकड़े बताकर राज्य प्रशासन ने समय बढ़ाने की सिफारिश की थी। बताया जा रहा है कि बूथ-स्तर के अधिकारी (बीएलओ) लगातार घर-घर जाकर सत्यापन का काम कर रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में जनसंख्या घनत्व अधिक होने और फॉर्म भरने की प्रक्रिया में देरी के कारण यह कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।

चुनाव आयोग ने पहले भी 30 नवंबर को एसआईआर की डेडलाइन को एक सप्ताह बढ़ाया था। तब आयोग ने कहा था कि जिन राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है, वहां अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी की जाएगी। यह तारीख आयोग की योजना के तहत ही तय की गई है ताकि 2024 और 2025 के चुनावी कार्यक्रम सुचारू रूप से संचालित हो सकें। मतदाता सूची का विस्तृत और त्रुटिरहित पुनरीक्षण आयोग के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया का आधार एक सटीक मतदाता सूची ही होती है।

एसआईआर प्रक्रिया का मूल उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना है। इसमें डुप्लीकेट वोटर हटाना, मृत मतदाताओं के नाम निकालना, दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाना और नए योग्य मतदाताओं को शामिल करना शामिल है। खासकर 18 वर्ष से ऊपर के नए मतदाताओं का नाम जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, क्योंकि हर साल लाखों युवा पहली बार मतदान के योग्य बनते हैं। एसआईआर के तहत देशभर के 12 राज्यों में अभियान चलाया जा रहा है और लगभग 50 करोड़ मतदाताओं की छानबीन की जा रही है। यह एक विशाल और जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित बीएलओ और पर्यवेक्षकों की टीम तैनात की गई है

एसआईआर की घोषणा के बाद से ही कई स्थानों पर इसका विरोध भी देखने को मिला। कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया चुनाव से पहले मतदाताओं के नाम हटाने या संशोधन करने का एक तरीका है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा कि एसआईआर एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल सूची को अद्यतन रखना है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता की कोई संभावना नहीं है। आयोग का तर्क है कि एक पारदर्शी और भरोसेमंद चुनाव तभी संभव है, जब मतदाता सूची त्रुटिहीन हो।

कई राज्यों में विरोध इसलिए भी हुआ कि लोगों का कहना था कि एसआईआर के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और गांवों, कस्बों तथा दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक बीएलओ समय पर नहीं पहुंच पा रहे। इसके अलावा कई जगह फॉर्म उपलब्ध न होने, बूथ केंद्रों पर भीड़ और बीएलओ की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आईं। आयोग ने इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पहले समयसीमा बढ़ाई और अब दूसरी बार अवधि बढ़ाने की तैयारी में है।

एसआईआर प्रक्रिया के विस्तृत स्वरूप को देखते हुए आयोग चाहता है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम छूटने न पाए। साथ ही, डुप्लीकेट नाम या मृत मतदाताओं के नाम हटाने जैसी जरूरी प्रक्रिया में किसी तरह की जल्दबाजी न हो। इसलिए, समयसीमा बढ़ाना आयोग के लिए एक व्यावहारिक कदम है, जिससे बीएलओ को पर्याप्त समय मिल सके और मतदाता सूची पूरी तरह से अद्यतन हो सके।