फडणवीस बोले- औरंगजेब की तारीफ वाले विचारों को कुचल देंगे:महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र की सुरक्षा बढ़ी, बजरंग दल-VHP की मांग- इसे हटाएं

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) में स्थित औरंगजेब की कब्र हटाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने महाराष्ट्र सरकार से इसे जल्द हटाने की मांग की है। विवाद के बीच कब्र की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) महाराष्ट्र और गोवा के क्षेत्रीय मंत्री गोविंद शेंडे ने औरंगजेब की कब्र को गुलामी का प्रतीक बताया। उन्होंने सोमवार को कहा- औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज को मारने से पहले 40 दिनों तक यातना दी थी। ऐसे क्रूर शासक का निशान क्यों रहना चाहिए।

उधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक कार्यक्रम में कहा- क्रूर औरंगजेब के बर्बर विचारों का महिमामंडन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उस विचार को वहीं कुचल दिया जाएगा।

विवाद की शुरुआत: औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग

वर्ष 2025 में, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने महाराष्ट्र सरकार से औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग की। इन संगठनों का कहना है कि औरंगजेब एक अत्याचारी शासक था जिसने भारतीय समाज को बहुत कष्ट पहुँचाया था। VHP के नेता गोविंद शेंडे ने औरंगजेब को ‘गुलामी का प्रतीक’ करार देते हुए कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज की हत्या से पहले औरंगजेब ने उन्हें 40 दिन तक यातनाएं दी थीं। उन्होंने यह सवाल उठाया कि ऐसे क्रूर शासक का निशान क्यों बने रहना चाहिए।

बजरंग दल और VHP ने यह भी आरोप लगाया कि औरंगजेब की कब्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करने से समाज में गलत संदेश जाता है। इन संगठनों का मानना है कि औरंगजेब के द्वारा हिंदू धर्म और संस्कृति पर जो अत्याचार किए गए, उनका स्मारक अब समाज के लिए एक चुनौती बन चुका है।

मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान और राजनीतिक प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग औरंगजेब के बर्बर विचारों का महिमामंडन कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र सरकार इस तरह के विचारों को कुचलने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि औरंगजेब के क्रूर विचारों का समर्थन करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस बयान के बाद महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर फिर से राजनीतिक हलचल मच गई। जहां एक ओर हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया, वहीं दूसरी ओर शिवसेना और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को तूल देने पर आपत्ति जताई। शिवसेना नेता संजय राउत ने इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि औरंगजेब की कब्र मराठा साम्राज्य के शौर्य का प्रतीक है और इसे हटाने से मराठा इतिहास को नुकसान होगा।

हिंदू संगठनों का विरोध और प्रदर्शन

बजरंग दल और VHP के समर्थक इस मुद्दे को लेकर पूरे महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन संगठनों ने औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग करते हुए कई स्थानों पर मुग़ल आक्रांताओं के पुतले जलाए। तेलंगाना के गोशामहल से भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और कहा कि औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग सही है।

टी राजा सिंह ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को 15 मार्च को एक पत्र लिखकर इस मुद्दे पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा आवंटित खर्च की जानकारी मांगी थी। उन्होंने यह सवाल उठाया कि हिंदू राजाओं की हत्या करने वाले औरंगजेब की कब्र पर सरकारी खर्च का क्या औचित्य है। उनका कहना था कि करदाताओं का पैसा एक ऐसे तानाशाह की कब्र पर खर्च नहीं होना चाहिए, जिसने भारतीय समाज को बहुत पीड़ा दी।

महाराष्ट्र सरकार ने औरंगजेब की कब्र पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। पुलिस ने इलाके में बैरिकेड्स लगाए हैं और कब्र के मुख्य द्वार को बंद कर दिया है। अब केवल एक व्यक्ति को एक बार में कब्र के पास जाने की अनुमति है। पुलिस ने इस क्षेत्र में सख्त सुरक्षा व्यवस्था बनाई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

इस बीच, हिंदू संगठनों के नेता यह चेतावनी दे रहे हैं कि अगर सरकार कब्र हटाने का कदम नहीं उठाती, तो वे बाबरी मस्जिद के जैसी कारसेवा की योजना बना सकते हैं। नितिन महाजन ने कहा कि अगर सरकार ने कब्र नहीं हटाई तो इसका हश्र बाबरी मस्जिद जैसा होगा, और वे हिंदू समाज के अस्तित्व को लेकर आंदोलन करेंगे।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

इस विवाद पर कांग्रेस ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि बजरंग दल और VHP के पास करने के लिए कुछ नहीं बचा है और वे चाहते हैं कि महाराष्ट्र में शांति न हो। उनका कहना था कि अगर औरंगजेब की कब्र हटाई जाती है, तो इससे किसी को कोई लाभ नहीं मिलेगा। औरंगजेब 27 साल तक भारत में रहा, लेकिन राज्य के लिए उसने कुछ नहीं किया। उनकी कब्र हटाने से क्या हासिल होगा, यह सवाल कांग्रेस ने उठाया है।

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