अयोध्या नगरी आज एक बार फिर इतिहास के उस स्वर्णिम पन्ने पर खड़ी है, जहां भक्ति भी है, परंपरा भी… और एक नया अध्याय भी। राम मंदिर के शिखर पर आज केसरिया धर्म ध्वज फहराया गया—एक ऐसा क्षण, जिसे करोड़ों श्रद्धालु वर्षों से देखने की प्रतीक्षा कर रहे थे। मंदिर का निर्माण पूर्ण होने के बाद पहली बार यह पवित्र ध्वजा शिखर पर लहराई, और पूरा अयोध्या भक्ति, उत्सव और भावनाओं से सराबोर हो उठा।
शहर को आज खास तौर पर सुसज्जित किया गया। रंग-बिरंगी लाइटिंग से लेकर पुष्प सजावट तक, हर गली, हर मार्ग और हर चौराहा प्रभु राम की महिमा में रौशन नजर आया। बीती रात मंदिर के शिखर पर प्रभु राम और माता सीता पर आधारित लेज़र शो ने माहौल को और आध्यात्मिक बना दिया, जिसने देखने वालों के दिलों में भक्ति और गर्व दोनों जगा दिए।
44 मिनट का क्यों था यह शुभ मुहूर्त?
ध्वजारोहण ठीक उसी समय किया गया जिसे अभिजीत मुहूर्त कहा जाता है—सूर्य के प्रभाव वाला वह समय जो सबसे पवित्र माना जाता है।
आज का शुभ मुहूर्त:
सुबह 11:45 से दोपहर 12:29 बजे तक — कुल 44 मिनट।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मान्यता है कि भगवान राम का जन्म भी अभिजीत मुहूर्त में ही हुआ था, इसलिए मंदिर पर ध्वजा फहराने के लिए इससे अधिक शुभ समय कोई और नहीं हो सकता था। यह समय सीधा भगवान राम की जन्म ऊर्जा और दिव्य शक्ति से जुड़ा माना जाता है।

25 नवंबर का चयन — संयोग या दिव्य योजना?
अयोध्या के साधु-संतों का मानना है कि आज का दिन बिल्कुल वही है जो त्रेता युग में भगवान राम और माता सीता के विवाह का दिन था—मार्गशीर्ष मास, शुक्ल पक्ष, पंचमी तिथि।
इसी पंचमी को ‘विवाह पंचमी’ कहा जाता है और इसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है।
इसलिए धर्मध्वज का आरोहण किसी साधारण दिन पर नहीं, बल्कि उसी दिव्य तिथि पर किया गया जो भगवान राम के जीवन से गहराई से जुड़ी है।
क्यों खास है राम मंदिर का यह धर्म ध्वज?
शिखर पर फहराया गया ध्वज पूरी तरह केसरिया रंग का है—एक ऐसा रंग जो सनातन धर्म के मूल तत्वों को समेटे हुए है:
- त्याग का प्रतीक
- वीरता का प्रतीक
- बलिदान का प्रतीक
- ज्ञान और भक्ति का रंग
ध्वज का आकार और निर्माण भी विशेष ध्यान से तय किया गया है—
- लंबाई: 22 फीट
- चौड़ाई: 11 फीट
- ध्वजदंड: 42 फीट
- फहराया गया: 161 फीट ऊँचे शिखर पर
ध्वज पर तीन पवित्र चिन्ह अंकित किए गए हैं—
सूर्य, ऊं और कोविदार वृक्ष।
ये तीनों प्रतीक सीधे सूर्यवंश और रघुवंश की परंपरा से जुड़े हैं, जिनसे प्रभु श्रीराम का वंश चलता है।

ध्वज पर उकेरे गए पवित्र चिन्हों का महत्व
1. सूर्य का प्रतीक
राम सूर्यवंशी हैं। सूर्य शक्ति, प्रकाश, विजय और धर्म के मार्ग का प्रतीक है। सूर्य का चिह्न ध्वज पर विजय और ऊर्जा का संदेश देता है।
2. ‘ऊं’ का चिन्ह
‘ऊं’ को सभी मंत्रों का प्राण कहा गया है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड, सृष्टि और दिव्यता का प्रतिनिधि है।
ध्वज पर ‘ऊं’ अंकित होने का मतलब—पूरा मंदिर परिसर दिव्य स्पंदन से भर गया है।
3. कोविदार वृक्ष
कोविदार वृक्ष का वर्णन वाल्मीकि रामायण, महाभारत और कई ग्रंथों में मिलता है। इसे दिव्य वृक्ष माना गया है।
रघुवंश के राजाओं के ध्वज पर भी यह वृक्ष अंकित होता था।
संयोग से भरत जब राम से मिलने वन में गए थे, उस समय उनके ध्वज पर भी कोविदार का चिन्ह था।
ये तीनों प्रतीक मिलकर ध्वज को सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि धर्म, परंपरा और दिव्यता का मिलाजुला स्वरूप बनाते हैं।
राम मंदिर पर ध्वजारोहण का धार्मिक महत्व
मंदिरों पर ध्वजा फहराने की परंपरा बेहद प्राचीन है।
गरुड़ पुराण में लिखा है:
- जहाँ ध्वज लहराता है, वहाँ देवता की उपस्थिति बनी रहती है।
- जिस दिशा में ध्वज लहराए, वह क्षेत्र पवित्र माना जाता है।
शिखर का ध्वज देवता की शक्ति, महिमा और संरक्षण का प्रतीक होता है।
वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस दोनों में ध्वज, पताका और तोरणों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
आज जब राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज लहराया—
यह सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि एक घोषणा है:
अयोध्या में रामराज्य की पुनर्स्थापना हो चुकी है।
यह क्षण त्रेता के राम जन्मोत्सव जैसा ही है, बस आज घोषणा उनके मंदिर निर्माण के पूर्ण होने की है।


