Political Clash Over Fertilizer Protest

जयपुर/बारां, 23 अक्टूबर 2026। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर मीणा समाज के दो चर्चित चेहरों के बीच जुबानी टकराव सुर्खियों में है। किसान नेता नरेश मीणा और भजनलाल सरकार के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के बीच बढ़ती तल्खी ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। बारां जिले के छबड़ा में किसानों को डीएपी खाद नहीं मिलने के मुद्दे पर नरेश मीणा ने प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। इसी दौरान किरोड़ी लाल मीणा को लेकर की गई उनकी टिप्पणी विवाद का कारण बन गई।

खाद की किल्लत से शुरू हुआ विवाद, सड़कों पर उतरे किसान
बारां जिले के छबड़ा क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई के बीच डीएपी खाद की कमी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। गुरुवार को बड़ी संख्या में किसान सुबह से खाद लेने के लिए कतारों में खड़े थे। घंटों इंतजार करने के बावजूद खाद नहीं मिलने पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा।

नाराज किसानों ने छबड़ा-सालपुरा स्टेट हाईवे-51 पर जाम लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान कृषि मंत्री और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।

किसानों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर नरेश मीणा मौके पर पहुंचे। उन्होंने पेड़ पर चढ़कर किसानों को संबोधित किया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इसके बाद किसानों के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचकर धरना शुरू कर दिया।

नरेश मीणा ने अधिकारियों को दी चेतावनी, किरोड़ी लाल पर साधा निशाना
छबड़ा में एसडीएम और कृषि विभाग के अधिकारियों से बातचीत के दौरान नरेश मीणा का आक्रामक रुख देखने को मिला। उन्होंने अधिकारियों पर किसानों की अनदेखी करने और खाद वितरण में पक्षपात करने का आरोप लगाया।

वायरल वीडियो में नरेश मीणा अधिकारियों से कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे जनता के लिए काम करें और किरोड़ी लाल मीणा की दलाली करना बंद करें। उन्होंने किरोड़ी लाल मीणा और अधिकारियों के खिलाफ ‘इलाज कर दूंगा’ जैसी चेतावनी भरी भाषा का भी इस्तेमाल किया।

नरेश मीणा ने आरोप लगाया कि खाद के कट्टे भाजपा से जुड़े लोगों को दिए जा रहे हैं, जबकि आम किसानों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। हालांकि, खाद वितरण में राजनीतिक पक्षपात के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कभी ‘छोटे किरोड़ी’ कहलाते थे नरेश मीणा, अब खुलकर विरोध
राजस्थान की राजनीति में नरेश मीणा को कभी ‘छोटे किरोड़ी’ के नाम से भी पहचाना जाता था। इसकी वजह उनका आक्रामक राजनीतिक अंदाज और जनसमस्याओं को लेकर आंदोलन करने की शैली रही है।

लेकिन अब परिस्थितियां बदली हुई नजर आ रही हैं। किसानों की समस्याओं को लेकर नरेश मीणा सीधे कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर सवाल उठा रहे हैं।

राजनीतिक दृष्टि से यह टकराव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दोनों नेताओं की पहचान जनआंदोलनों और मीणा समाज की राजनीति से जुड़ी रही है। ऐसे में दोनों के बीच बढ़ती दूरी आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

सोशल मीडिया पर भिड़े समर्थक, बयान को लेकर बढ़ी नाराजगी
नरेश मीणा का वीडियो सामने आने के बाद किरोड़ी लाल मीणा के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई है। समर्थक कृषि मंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

दूसरी ओर, नरेश मीणा के समर्थक किसानों की समस्याओं को लेकर उनके आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। इस विवाद के बाद दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

मामला अब केवल खाद की उपलब्धता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी और नेताओं के समर्थकों के बीच प्रतिष्ठा का सवाल भी बनता जा रहा है।

शुक्रवार शाम 4 बजे तक का अल्टीमेटम
नरेश मीणा ने गुरुवार को प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि शुक्रवार शाम चार बजे तक किसानों के लिए पर्याप्त खाद की व्यवस्था नहीं की गई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

उन्होंने आंदोलन के दौरान रात भी धरनास्थल पर पेड़ के नीचे चारपाई पर बिताई।

शुक्रवार सुबह करीब 900 किसानों को डीएपी खाद के टोकन वितरित किए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इसके बावजूद नरेश मीणा धरने पर डटे हुए थे।

प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को खाद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसानों की मांग है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर खाद का वास्तविक वितरण सुनिश्चित किया जाए।

पंचायत चुनाव से पहले सियासी समीकरणों पर असर?
राजस्थान में पंचायत चुनावों की राजनीतिक गतिविधियों के बीच नरेश मीणा और किरोड़ी लाल मीणा के समर्थकों में बढ़ती तनातनी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषण के नजरिए से इस विवाद के दो पहलू हैं। पहला, किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की प्रशासनिक जिम्मेदारी और दूसरा, इसी मुद्दे पर दो प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों के बीच बढ़ता टकराव।

यदि दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी जारी रहती है, तो इसका असर स्थानीय राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है। हालांकि, किसी चुनावी प्रभाव का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी।

किसानों की समस्या के बीच राजनीतिक बयानबाजी बनी चर्चा का विषय
छबड़ा में शुरू हुए इस पूरे विवाद का मूल मुद्दा किसानों को समय पर डीएपी खाद उपलब्ध नहीं होना है। रबी फसलों की बुवाई के समय खाद की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।

लेकिन नरेश मीणा की किरोड़ी लाल मीणा पर टिप्पणी ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसानों की खाद संबंधी समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएगा या यह विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ेगा?

फिलहाल राजस्थान की सियासत में नरेश मीणा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच बढ़ती तल्खी चर्चा का विषय बनी हुई है।

By Deepak Arora

दीपक अरोड़ा एक मीडिया उद्यमी, डिजिटल रणनीतिकार और लेखक हैं। "दीपक की कलम से" के माध्यम से वे राजनीति, समाज, शिक्षा, मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है।