नागौर, 28 अक्टूबर 2026। राजस्थान में पंचायत चुनावों के दौरान नागौर जिले के मोड़ी और भूंडेल गांव इन दिनों चर्चा में हैं। वजह चुनाव में किसी प्रत्याशी की जीत नहीं, बल्कि हारने वाले उम्मीदवारों को ग्रामीणों की ओर से दिया गया सम्मान है।
आमतौर पर चुनाव परिणाम आने के बाद विजयी उम्मीदवारों के स्वागत और जश्न की तस्वीरें सामने आती हैं। लेकिन नागौर में ग्रामीणों ने चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों के परिवारों का हौसला बढ़ाने के लिए सामूहिक रूप से लाखों रुपये जुटाए।
मोड़ी और भूंडेल गांवों में ग्रामीणों ने मिलकर कुल 40 लाख रुपये की सम्मान राशि दी। ग्रामीणों का उद्देश्य चुनाव में खर्च हुई राशि के कारण प्रत्याशियों के परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना और उनका मनोबल बढ़ाना था।
मोड़ी गांव में चिड़ी देवी को मिले 25 लाख रुपये
नागौर जिले की मूंडवा पंचायत समिति के अंतर्गत भदौरा ग्राम पंचायत के मोड़ी गांव में चिड़ी देवी सरपंच पद का चुनाव लड़ रही थीं।
चिड़ी देवी के पति हेमाराम राव किसान हैं। चुनाव के दौरान गांव के विभिन्न समाजों के लोगों ने उनका समर्थन किया था। हालांकि, मतगणना के बाद चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया।
इसके बावजूद ग्रामीणों ने चिड़ी देवी और उनके परिवार के साथ खड़े रहने का फैसला किया। गांव के लोगों ने सामूहिक सहयोग से 25 लाख रुपये की राशि एकत्र की और परिवार को सम्मान स्वरूप भेंट कर दी।
ग्रामीणों का कहना था कि चुनाव में हार-जीत अलग बात है, लेकिन सामाजिक रिश्तों और आपसी सम्मान को बनाए रखना भी जरूरी है।
महज 162 वोटों से हार गई थीं चिड़ी देवी
भदौरा ग्राम पंचायत के सरपंच चुनाव में चिड़ी देवी का मुकाबला गिरिजा सांदू से था।
चुनाव परिणाम के अनुसार, गिरिजा सांदू को 1,317 वोट मिले, जबकि चिड़ी देवी को 1,155 मत प्राप्त हुए। इस तरह चिड़ी देवी को 162 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
प्रत्याशी: प्राप्त वोट
गिरिजा सांदू: 1,317
चिड़ी देवी: 1,155
जीत का अंतर: 162 वोट
चुनाव परिणाम आने के बाद ग्रामीणों ने एक बैठक की और चिड़ी देवी के परिवार का सम्मान करने का निर्णय लिया। इसके बाद ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ उनके घर पहुंचे और फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया।
25 लाख रुपये की राशि मिलने पर चिड़ी देवी के पति हेमाराम राव भावुक हो गए। उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग और सम्मान के प्रति आभार व्यक्त किया।
सामाजिक कार्यों से जुड़ा रहा है चिड़ी देवी का परिवार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिड़ी देवी के पति हेमाराम राव लंबे समय से गांव में सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने करीब दो साल पहले गांव की गौशाला को एक ट्रैक्टर भेंट किया था। इसके अलावा गांव में प्याऊ का निर्माण करवाने और बोरवेल खुदवाने जैसी पहल से भी उनका नाम जुड़ा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, परिवार के सामाजिक योगदान के कारण चुनाव के दौरान उन्हें समर्थन मिला था। चुनाव हारने के बाद भी ग्रामीणों ने परिवार के प्रति अपना सम्मान बनाए रखा।
भूंडेल में भी दिखा भाईचारा, गंगाराम को मिले 15 लाख रुपये
नागौर जिले की भूंडेल ग्राम पंचायत में भी ऐसा ही मामला सामने आया है।
यहां सरपंच पद का चुनाव हारने वाले गंगाराम को ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग देने का फैसला किया। भूंडेल, श्रीयादे नगर और नेनाऊ गांव के लोगों ने मिलकर 15 लाख रुपये की सम्मान राशि जुटाई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह राशि गंगाराम को इसलिए दी गई ताकि चुनावी खर्च का आर्थिक बोझ उनके परिवार पर अधिक न पड़े।
ग्रामीणों ने चुनावी परिणाम से अलग हटकर सामाजिक सहयोग को महत्व दिया और गंगाराम के परिवार का हौसला बढ़ाया।
15 लाख मिलने के बाद गंगाराम ने गौशाला को दिए 51 हजार
भूंडेल में सम्मान राशि मिलने के बाद गंगाराम ने भी सामाजिक कार्य के लिए योगदान देने की पहल की।
प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, गंगाराम ने ग्रामीणों से मिली 15 लाख रुपये की राशि में से 51 हजार रुपये स्थानीय गौशाला के विकास के लिए दान किए।
उनकी इस पहल को ग्रामीणों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करने के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, 15 लाख रुपये की सहायता और 51 हजार रुपये के दान की जानकारी मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
चुनावी हार के बाद ग्रामीणों ने दिया एकजुटता का संदेश
नागौर के इन दोनों गांवों में हुई घटनाओं ने पंचायत चुनावों के सामाजिक पहलू को भी सामने रखा है।
मोड़ी में चिड़ी देवी के परिवार को 25 लाख रुपये और भूंडेल में गंगाराम को 15 लाख रुपये देने की पहल से यह संदेश सामने आया कि चुनावी मुकाबला समाप्त होने के बाद भी गांव के लोगों के बीच सहयोग और आपसी सम्मान बना रह सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार, चुनाव में किसी एक प्रत्याशी की जीत होती है, लेकिन गांव का विकास और सामाजिक एकता सभी की साझा जिम्मेदारी है।
राजस्थान पंचायत चुनाव के बीच नागौर की पहल चर्चा में
राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं। इस बीच नागौर जिले के मोड़ी और भूंडेल गांवों में चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों को सम्मान राशि देने की घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।
दोनों गांवों में ग्रामीणों की ओर से कुल 40 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की खबर सामने आई है।
यह घटनाक्रम बताता है कि स्थानीय चुनावों में मतदाताओं और प्रत्याशियों के संबंध केवल चुनाव परिणाम तक सीमित नहीं होते। सामाजिक योगदान, आपसी विश्वास और सामुदायिक सहयोग भी ग्रामीण जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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