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RAGHAV CHADHA की मशहूरियत से डर गई AAP?

RAGHAV CHADHA की मशहूरियत से डर गई AAP?

राजनीति भी क्या अजब चीज़ है! यहां कल के ‘पोस्टर बॉय’ आज ‘किनारे’ लगा दिए जाते हैं और जो कभी कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे, वे आज एक-दूसरे की आंखों की पुतलियों में खोट ढूंढ रहे हैं… आम आदमी पार्टी के खेमे में इन दिनों जो ‘घमासान’ मचा है, उसने साबित कर दिया है कि राजनीति में ‘दोस्ती’ स्थायी नहीं होती…पंजाब के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, जो कभी अपनी मखमली आवाज़ और सलीके से संवारी गई जुल्फों के साथ पार्टी की ‘रणनीति’ का चेहरा हुआ करते थे, आज खुद को एक क्रांतिकारी के रूप में पेश कर रहे हैं… राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाने पर राघव चड्ढा के भीतर का एक ‘शायर’ और एक ‘विद्रोही’ जाग उठा… उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक ऐसा वीडियो डाला, जिसने पार्टी के खेमे में ‘भूकंप’ नहीं, बल्कि सुनामी’ ला दी…

राघव चड्ढा का सवाल था कि “क्या जनता के मुद्दों को उठाना अपराध है? और सवाल तो दमदार था… लेकिन सस्पेंस तो तब बढ़ा, जब उन्होंने खुलासा किया कि उनकी अपनी ही पार्टी ने सचिवालय को पत्र लिखकर कहा है कि “भाई साहब को बोलने न दिया जाए “… अब भला कोई अपने ही सितारे की ज़ुबान पर ताला क्यों लगाना चाहेगा? राघव का कहना है कि, वे ‘आम आदमी’ की बात करते हैं, पर शायद वे भूल गए कि ‘आम आदमी पार्टी’ में अब ‘आम’ होने की भी एक तय गाइडलाइन है.. उन्होंने अंत में जो डायलॉग मारा “मेरी खामोशी को हार मत समझना, मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है”… उसे सुनकर बॉलीवुड के राइटर भी अपनी कलम तोड़ लें… पर सवाल ये है कि, ये सैलाब पार्टी को बचाएगा या डुबोएगा?

राघव का ‘सैलाब’ अभी शांत भी नहीं हुआ था कि, आम आदमी पार्टी ने पलटवार कर डाला… पूर्व सीएम आतिशी ने राघव चड्ढा से सवाल किया कि, क्या आप बीजेपी और मोदी से डर गए?

इसके साथ ही पार्टी अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी वीडियो जारी करते हुए तर्क दिया कि, “संसद में समय कम होता है, और उस कीमती वक्त में कोई एयरपोर्ट के समोसे सस्ते करवाने की बात करे, तो जनता का क्या होगा?”…

जिस राघव चड्ढा को पार्टी कभी अपना सबसे पढ़ा-लिखा और सुलझा हुआ चेहरा बताती थी, आज उसी को ‘सॉफ्ट पीआर’ करने वाला और ‘समोसा एक्सपर्ट’ करार दे दिया गया… पार्टी का कहना है कि, जब देश जल रहा था, तब राघव बाबू शायद कैंटीन का मेन्यू कार्ड ठीक कर रहे थे…इतना ही नहीं, इस लड़ाई में घी डालने का काम किया अनुराग ढांडा के की एक पोस्ट ने… उन्होंने लिखा:

“हम केजरीवाल के सिपाही हैं… निडरता पहली पहचान है हमारी। कोई मोदी से डर जाए तो लड़ेगा क्या देश के लिए? संसद में थोड़ा सा समय मिलता है बोलने का पार्टी को, उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का। गुजरात में हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ता बीजेपी की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिए, क्या सांसद साहब सदन में कुछ बोले? पश्चिम बंगाल में वोट का अधिकार छीना जा रहा है। सदन में प्रस्ताव आया CEC के खिलाफ तो भाई साहब ने साइन करने से मना कर दिया। पार्टी ने सदन से वाकआउट किया तो मोदी जी की हाजिरी लगाने के लिए बैठे रहते हैं। पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो। देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो। जो डर गया वो…..”।

संदेश साफ है… “राघव, तुम डर गए हो।”… ऐसे में सवाल उठने भी लाजमी है कि, जब पार्टी अपने ही सांसद को सोशल मीडिया पर “जो डर गया वो, मर गया…” लिखकर चुनौती देने लगे, तो समझ लीजिए कि ‘दरार’ नहीं, ‘खाई’ बहुत गहरी हो चुकी है।

कहानी की असली जड़ ‘शराब घोटाले’ के उस फैसले में छिपी है, जिसने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को राहत दी थी… जब पूरी पार्टी ढोल-नगाड़ों के साथ नाच रही थी, तब राघव चड्ढा का ‘नदारद’ होना और कोई ‘बधाई संदेश’ न देना, पार्टी के हाईकमान को चुभ गया… आखिर जिस रणनीतिकार ने सालों तक पार्टी का झंडा बुलंद किया, वो सबसे बड़ी जीत के जश्न में ‘गायब’ क्यों था?

जानकारों का कहना है कि राघव के सोशल मीडिया से पार्टी का झंडा, डंडा और निशान गायब होना महज इत्तेफाक नहीं था… ये एक ‘अघोषित अलगाव’ था। राघव शायद अब खुद को ‘ब्रांड चड्ढा’ की तरह पेश कर रहे थे, जो पार्टी लाइन से ऊपर उठकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाना चाहता था… लेकिन राजनीति में जब आप ‘पार्टी लाइन’ से बाहर कदम रखते हैं, तो अक्सर आप ‘ऑफसाइड’ करार दे दिए जाते हैं।

आज राघव चड्ढा की जगह अशोक मित्तल को उपनेता बनाना सिर्फ एक पद का फेरबदल नहीं, बल्कि राघव के लिए एक ‘एग्जिट गेट’ का इशारा है। एक तरफ राघव का “दरिया और सैलाब” वाला ईगो है, और दूसरी तरफ पार्टी का “समोसा और वफादारी” वाला पैमाना। कुल मिलाकर, आम आदमी पार्टी के भीतर की ये जंग अब ड्राइंग रूम से निकलकर सोशल मीडिया के अखाड़े में आ गई है… राघव चड्ढा को अब तय करना होगा कि, वे वो ‘दरिया’ बनेंगे जो अपनी राह खुद बनाता है, या फिर वे उस ‘समोसे’ की तरह किनारे कर दिए जाएंगे जिसकी, चटनी अब पार्टी को पसंद नहीं आ रही। फिलहाल तो जनता मजे ले रही है, क्योंकि “आम आदमी” की बात करने वालों के बीच अब “खास” बनने की होड़ जो लगी है!

Abhishek Saini

वर्तमान में मैं 4Iconic Media Group में पिछले तीन वर्षों से न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हूं। पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 15 वर्षों के अनुभव के साथ संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और कंटेंट की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हूं। अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सुदर्शन न्यूज से की, जिसके बाद A2Z न्यूज चैनल, जनता टीवी, MH1 न्यूज सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला। समाचार संपादन, कंटेंट प्लानिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग और न्यूजरूम मैनेजमेंट में व्यापक अनुभव हासिल किया है। लेखन मेरा जुनून है और निष्पक्ष, प्रभावशाली तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के माध्यम से समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा हूं। मीडिया जगत में अपने अनुभव, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक सोच के बल पर लगातार नए आयाम स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा हूं।

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