पुष्कर मेला

अजमेर: राजस्थान का विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला एक बार फिर देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तैयार है। पुष्कर मेला 2026 का आयोजन 10 से 26 नवंबर तक किया जाएगा। इस दौरान पुष्कर की धरती पर राजस्थानी संस्कृति, पशुधन, लोक परंपराओं और देशी-विदेशी पर्यटकों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

पुष्कर मेला राजस्थान की पहचान से जुड़े प्रमुख आयोजनों में शामिल है। ऊंटों की सजावट, पशु प्रतियोगिताएं, राजस्थानी साफा, लंबी मूंछें और सांस्कृतिक कार्यक्रम हर साल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। राजस्थान पर्यटन भी पुष्कर मेले को दुनिया के प्रमुख ऊंट एवं पशु मेलों में गिनता है।

पशुओं की एंट्री के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट जरूरी
इस बार मेले में पशुओं की एंट्री को लेकर नियम पहले से अधिक सख्त किए गए हैं। मेले में लाए जाने वाले प्रत्येक पशु के लिए सरकारी अस्पताल से हेल्थ सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा।

संबंधित अधिकारियों की ओर से सत्यापन के बाद ही ऑनलाइन पोर्टल के जरिए प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मेला मैदान को अलग-अलग सेक्टरों में बांटने की तैयारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार घोड़ों के लिए करीब 1600 प्लॉट निर्धारित किए गए हैं, जबकि ऊंटों के लिए अलग खुले क्षेत्र की व्यवस्था की गई है।

विदेशी मेहमान बांधेंगे राजस्थानी साफा
पुष्कर मेले की सबसे खास प्रतियोगिताओं में इस बार भी साफा और मूंछ प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रहने वाली है।

21 नवंबर को विदेशी पर्यटकों के बीच साफा बांधने की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। वहीं राजस्थानी अंदाज की शान मानी जाने वाली मूंछ प्रतियोगिता में प्रतिभागी अपनी रौबीली मूंछों का प्रदर्शन करेंगे।

पुष्कर मेले में ऐसी प्रतियोगिताएं लंबे समय से देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती रही हैं। राजस्थान पर्यटन की जानकारी में भी लंबी मूंछ प्रतियोगिता और विदेशी पर्यटकों के साथ होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों को प्रमुख आकर्षणों में शामिल किया गया है।

ऊंटों का डांस और घोड़ों की रफ्तार भी दिखेगी
मेले के दौरान ऊंटों को खास तरीके से सजाकर उनकी प्रतियोगिताएं और डांस आयोजित किए जाएंगे। वहीं मारवाड़ी और काठियावाड़ी घोड़ों के डांस के साथ उनकी क्षमता से जुड़े कार्यक्रम भी देखने को मिलेंगे।

इस बार पुष्कर से धार्मिक स्थल देवमाली तक विशेष हॉर्स-राइड की तैयारी भी की गई है। इसके अलावा घोड़ों की स्टेमिना टेस्टिंग भी आयोजित की जाएगी।

17 नवंबर को होगा मेले का विधिवत शुभारंभ
पुष्कर मेले का धार्मिक और औपचारिक शुभारंभ 17 नवंबर को पूजा-अर्चना, ध्वजारोहण और ब्रह्मा मंदिर से निकलने वाली मशाल यात्रा के साथ होगा।

इसके बाद कई दिनों तक अलग-अलग सांस्कृतिक और खेल गतिविधियां आयोजित होंगी। इनमें विदेशी पर्यटकों के साथ फुटबॉल, ऊंट सजावट और कैमल डांस, घोड़ों का डांस, कबड्डी, स्पिरिचुअल वॉक और फूड-क्राफ्ट फेस्टिवल जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

क्रिकेट मैच में भारत और विदेशी पर्यटक आमने-सामने
22 और 23 नवंबर को देशी और विदेशी पर्यटकों के बीच क्रिकेट मैच भी आयोजित किया जाएगा। महिलाओं के लिए मटका रेस भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

इसके अलावा 24 नवंबर को मेगा कल्चरल इवेंट और पशु पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुओं और प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।

देशभर से पहुंचेंगे पशुपालक और व्यापारी
पुष्कर मेले में राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और दक्षिण भारत से पशुपालकों एवं व्यापारियों के पहुंचने की उम्मीद है।

मेले में पशुओं की खरीद-बिक्री के साथ-साथ राजस्थान की लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, खान-पान और पारंपरिक जीवनशैली भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती है। यही वजह है कि पुष्कर मेला सिर्फ पशु मेला नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति को करीब से देखने का बड़ा अवसर बन चुका है।

पर्यटकों के लिए क्यों खास है पुष्कर मेला?
पुष्कर मेला देशी-विदेशी पर्यटकों को राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति से जोड़ने वाला बड़ा आयोजन है। रंग-बिरंगे साफे, रौबीली मूंछें, सजे हुए ऊंट, मारवाड़ी घोड़े, लोक संगीत और रेगिस्तानी माहौल इस मेले को खास बनाते हैं।

10 से 26 नवंबर तक चलने वाले पुष्कर मेले में इस बार साफा प्रतियोगिता, मूंछ प्रतियोगिता, कैमल डांस, हॉर्स डांस, विदेशी पर्यटकों के साथ खेल प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहेंगे।

By Deepak Arora

दीपक अरोड़ा एक मीडिया उद्यमी, डिजिटल रणनीतिकार और लेखक हैं। "दीपक की कलम से" के माध्यम से वे राजनीति, समाज, शिक्षा, मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है।