अंबाला में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर हुआ कार्यक्रमअंबाला में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर हुआ कार्यक्रम

अंबाला में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर हुआ कार्यक्रम

 

हरियाणा आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर गर्व और देशभक्ति से सराबोर है। राज्यभर में इस अवसर को “वंदे मातरम् स्मरण उत्सव” के रूप में मनाया जा रहा है।

अंबाला शहर के पुलिस लाइन मैदान में आयोजित मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति से जुड़े महत्व पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गान से हुई, जिसके बाद मंच पर रंगारंग देशभक्ति प्रस्तुतियां दी गईं। हजारों की संख्या में आए स्कूली बच्चे, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक और आम नागरिकों ने इस ऐतिहासिक उत्सव में हिस्सा लिया।

CM सैनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, ये अंबाला की धरती ही थी, जहाँ से 1857 की पहली आजादी की लड़ाई की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि, “आज ये हमारे लिए गर्व का विषय है कि, उसी ऐतिहासिक धरती से हम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं

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ये गीत भारत के आत्म-सम्मान, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है।” साथ ही उन्होंने कि, ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के हर नागरिक को एकजुट किया।

ये गीत केवल शब्द नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति हमारी आस्था और समर्पण की आवाज़ है। CM सैनी ने युवाओं से अपील की कि, वे राष्ट्रगीत की भावना को आत्मसात करें और देश की सेवा के लिए हर संभव योगदान दें

साथ ही इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी दिल्ली से सीधा प्रसारित किया गया। PM ने अपने संदेश में कहा कि, ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के हर नागरिक के मन में जोश और देशभक्ति का संचार किया।

उन्होंने कहा कि, आज जब भारत विश्व में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, ऐसे समय में ये गीत हमें अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़े रखने का काम करता है। साथ ही PM ने कहा कि, आज का भारत “वंदे मातरम्” की भावना के साथ आत्मनिर्भरता, एकता और विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में डीसी शैलेंद्र तोमर ने कहा कि, “वंदे मातरम् भारत की आत्मा, अस्मिता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।” उन्होंने बताया कि, ये गीत बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया था, जिसने आज़ादी की लड़ाई के दौरान लाखों देशभक्तों के दिलों में जोश भर दिया था।

उन्होंने कहा कि, इस गीत की शक्ति ने उस दौर में अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस गीत के शब्दों में छिपे भाव को समझें और भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनाने में अपना योगदान दें।

मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ जिले के अन्य उपमंडलों में भी इसी थीम पर स्मरण उत्सव मनाया गया। सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर भी ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गान, भाषण प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

डीसी ने पहले ही जनता से अपील की थी कि, वे अधिक से अधिक संख्या में इस ऐतिहासिक उत्सव में भाग लें। लोगों ने भी उत्साह के साथ इसका पालन किया। हर ओर तिरंगा लहराता नजर आया और माहौल राष्ट्रभक्ति से भर गया।

आपको बता दें कि, ‘वंदे मातरम्’ की रचना वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चटर्जी ने की थी, और ये गीत उनके उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा था। उस समय इस गीत ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीयों में आज़ादी की लहर पैदा की।

ये गीत स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा का स्रोत बना। स्वतंत्र भारत में भी ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया, जबकि ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया।

अंबाला में हुआ ये कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि एकता और देशभक्ति का प्रदर्शन भी था। मंच से लेकर दर्शकों तक हर ओर “वंदे मातरम्” की गूंज थी। युवा, महिलाएं और बुजुर्गसभी के चेहरों पर गर्व और उल्लास दिखाई दिया।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि, आने वाली पीढ़ियों को ये जानना जरूरी है कि, आज़ादी हमें कितने बलिदानों के बाद मिली है। उन्होंने कहा, “ये उत्सव हमें याद दिलाता है कि, देश के लिए एकता और समर्पण ही सबसे बड़ी शक्ति है।”