Premanandas padyatra: प्रेमानंद जी की पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगितPremanandas padyatra: प्रेमानंद जी की पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

Premanandas padyatra: प्रेमानंद जी की पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

वृंदावन के रमणरेती क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा बीते तीन दिनों से स्थगित है। आश्रम की ओर से जारी एक आधिकारिक सूचना में कहा गया है कि, महाराज की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण उनकी नियमित पदयात्रा को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। जैसे ही यह सूचना भक्तों तक पहुंची, उनकी आंखों से आंसू बह निकले। हजारों की संख्या में श्रद्धालु रोजाना उनके दर्शन के लिए आश्रम के बाहर जुटते हैं, इस उम्मीद में कि महाराज के एक झलक से उनका जीवन धन्य हो जाए।

प्रेमानंद महाराज पिछले कई वर्षों से प्रतिदिन तड़के 2 बजे श्रीकृष्ण शरणम् सोसाइटी से रमणरेती स्थित हित राधा केली कुंज आश्रम तक लगभग 2 किलोमीटर पदयात्रा करते थे। इस दौरान रास्ते भर भक्तों का हुजूम लगा रहता था। आम दिनों में यह संख्या 20 हजार के करीब होती थी, जबकि वीकेंड पर यह लाखों में पहुंच जाती थी। बड़े पर्वों पर तो यह संख्या तीन लाख से भी पार चली जाती थी।

लेकिन बीते तीन दिनों से महाराज पदयात्रा पर नहीं निकले। बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार, तीनों दिन श्रद्धालु रास्ते में खड़े रहे, पर महाराज के दर्शन नहीं हुए। शनिवार को आश्रम द्वारा अधिकारिक पुष्टि के बाद भक्तों में मायूसी छा गई।

आश्रम की ओर से कहा गया कि, महाराज के स्वास्थ्य में गिरावट आई है। आपको बता दें कि उन्हें पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज है, जो एक गंभीर और आनुवंशिक बीमारी है। जानकारी के अनुसार, प्रेमानंद महाराज को इस बीमारी के बारे में सबसे पहले 2006 में पता चला, जब उन्हें पेट में तेज दर्द हुआ।

तब वह कानपुर के एक डॉक्टर के पास गए और वहां उन्हें बताया गया कि उनकी दोनों किडनियां प्रभावित हैं। इसके बाद वह दिल्ली में विशेषज्ञ डॉक्टर से मिले, जहां पुष्टि हुई कि यह आनुवंशिक समस्या है और जीवन सीमित है। इस कठिन समाचार के बाद उन्होंने आध्यात्मिक जीवन को पूरी तरह समर्पित कर दिया।

काशी में शिव भक्ति से शुरुआत करने वाले प्रेमानंद महाराज ने बाद में वृंदावन में राधा नाम का जप प्रारंभ किया। यहीं से उन्होंने ‘राधे राधे’ के महामंत्र को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। महाराज ने अपनी दोनों किडनियों का नाम ‘कृष्णा’ और ‘राधा’ रखा है और इसे ही अपनी आध्यात्मिक तपस्या का आधार बना लिया है।

महाराज वर्तमान में श्रीकृष्ण शरणम् सोसाइटी के HR-1 ब्लॉक के दो फ्लैट (नंबर 209 और 212) में रहते हैं। इनमें से एक फ्लैट में वह स्वयं निवास करते हैं और दूसरे को चिकित्सा सेवा के लिए समर्पित किया गया है। यहीं पर डायलिसिस की पूरी व्यवस्था है। पहले यह प्रक्रिया अस्पताल में होती थी, लेकिन अब इस फ्लैट में ही अत्याधुनिक डायलिसिस मशीनें, मेडिकल टीम और सभी आवश्यक उपकरण मौजूद हैं। डायलिसिस सप्ताह में पहले 3-4 बार होती थी, जो अब प्रतिदिन हो रही है।

डायलिसिस की प्रक्रिया लगभग 4 से 5 घंटे चलती है और इस दौरान आधा दर्जन से ज्यादा विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी निगरानी करते हैं। इनमें से कई डॉक्टर अब महाराज के भक्त बन चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया से आए एक हार्ट स्पेशलिस्ट और उनकी प्रोफेसर पत्नी महाराज से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और वृंदावन में ही बस गए। वे अब प्रतिदिन उनकी सेवा में लगे रहते हैं।

महाराज के जीवन की कहानी केवल एक आध्यात्मिक गुरु की नहीं है, बल्कि वह उन लाखों युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं जो भटकाव में थे और जिन्होंने उनके प्रवचनों से जीवन का उद्देश्य पाया। भक्तों का कहना है कि प्रेमानंद जी के प्रवचन केवल धार्मिक नहीं बल्कि जीवन के व्यवहारिक पहलुओं पर भी गहराई से प्रकाश डालते हैं।

महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अखरी गांव में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनके बड़े भाई गणेश दत्त पांडे बताते हैं कि उनके पिता शंभू नारायण पांडे पुरोहित का कार्य करते थे और घर की पीढ़ी-दर-पीढ़ी परंपरा में कोई न कोई संत या साधु निकलता था। अनिरुद्ध भी बचपन से ही आध्यात्मिक रुचि रखते थे। परिवार में पूजा-पाठ का माहौल था और अनिरुद्ध बड़े ध्यान से सब कुछ देखा और सीखा करते थे।

गणेश पांडे बताते हैं कि अनिरुद्ध को बचपन से ही भक्ति में विशेष रुचि थी और वह घंटों भगवान के चित्रों के सामने बैठकर ध्यान करते थे। समय के साथ यह लगाव और भी गहरा होता गया और उन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग कर साधु-संतों का मार्ग अपना लिया।

आज, प्रेमानंद महाराज के अनुयायी देश-विदेश में फैले हुए हैं। उनकी आध्यात्मिक यात्रा, सेवा भावना और बीमारी के बावजूद अडिग भक्ति ने उन्हें साधु समाज में एक विशेष स्थान दिलाया है।

हालांकि अब उनका स्वास्थ्य चिंताजनक स्थिति में है, लेकिन भक्तों की प्रार्थनाएं निरंतर जारी हैं। हर दिन हजारों की संख्या में लोग राधा रानी से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि महाराज जल्द स्वस्थ हों और पुनः पदयात्रा शुरू करें।

अभी पदयात्रा भले ही स्थगित है, लेकिन श्रद्धालुओं का प्रेम, आस्था और विश्वास पहले की तरह अडिग है