premanand ji maharaj: वृंदावन में भारी बारिश से दिखा बाढ़ का कहर!premanand ji maharaj: वृंदावन में भारी बारिश से दिखा बाढ़ का कहर!

premanand ji maharaj: वृंदावन में भारी बारिश से दिखा बाढ़ का कहर!

देशभर में इन दिनों आसमानी आफत ने तबाही मचा रखी है। लगातार हो रही भारी बारिश से पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य बाढ़ की चपेट में हैं। इन राज्यों के कई जिले जलमग्न हो चुके हैं। नदियां उफान पर हैं और सड़कों से लेकर घरों तक पानी भर गया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और आम लोगों के सामने दो वक्त की रोटी और सुरक्षित स्थान की चुनौती खड़ी हो गई है।

premanand ji maharaj: वृंदावन में भारी बारिश से दिखा बाढ़ का कहर!
उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद स्थित पवित्र तीर्थ स्थल वृंदावन भी इस आपदा से अछूता नहीं रहा। यहां यमुना नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। पिछले आठ दिनों से लगातार बढ़ते जलस्तर के चलते वृंदावन के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। प्रसिद्ध परिक्रमा मार्ग, जहां सामान्य दिनों में श्रद्धालु पैदल या वाहनों से परिक्रमा करते हैं, वह अब नावों के सहारे पार किया जा रहा है। यमुना का पानी मंदिरों, गलियों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है

premanand ji maharaj: वृंदावन में भारी बारिश से दिखा बाढ़ का कहर!
ऐसे विकट समय में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज (premanand ji maharaj)ने बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सराहनीय पहल की है। प्रेमानंद महाराज(premanand ji maharaj) ने सोमवार की शाम अपने आश्रम ‘श्री हित राधा कुंज’ से नाव के जरिए बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया। उनके साथ उनके कई शिष्य भी मौजूद रहे। उन्होंने वृंदावन के विभिन्न हिस्सों का जायजा लिया और बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी। भोजन के पैकेट, पीने का पानी और अन्य आवश्यक सामान नाव के जरिए लोगों तक पहुंचाया गया।

प्रेमानंद महाराज(premanand ji maharaj) ने लगभग दो घंटे तक यमुना में नाव से भ्रमण किया और उन इलाकों में गए, जहां पहुंचना अब पैदल संभव नहीं है। उनके साथ उनके शिष्य भी पूरे सेवा भाव के साथ जुटे रहे और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाते रहे। इस सेवा कार्य का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें प्रेमानंद महाराज(premanand ji maharaj) अपने शिष्यों के साथ नाव में बैठे दिखाई दे रहे हैं और जलमग्न वृंदावन का दृश्य देख भावुक हो रहे हैं।
इस दौरान प्रेमानंद महाराज(premanand ji maharaj) ने कहा, “वृंदावन वासी भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त हैं। यहां की जनता भगवान की परम उपासक है

ऐसे में उन्हें इस प्रकार की पीड़ा नहीं मिलनी चाहिए। यमुने, तूने ये क्या किया?” बाढ़ की भयावहता देखकर महाराज भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि यह समय सिर्फ बोलने का नहीं, बल्कि कुछ करके दिखाने का है।

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उन्होंने कहा, “देश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। हजारों लोग भूखे हैं, बिजली और पानी की व्यवस्था ठप है। ऐसे समय में हमें ईश्वर द्वारा दिए गए सामर्थ्य के अनुसार लोगों की मदद करनी चाहिए।” उन्होंने समाज से अपील की कि जो लोग सक्षम हैं, वे आगे आएं और बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, पानी और जरूरी सामग्री का इंतजाम करें।

प्रेमानंद महाराज(premanand ji maharaj) ने कहा कि संत समाज हमेशा आपदा के समय समाज के साथ खड़ा रहा है और आज भी उनके शिष्य नाव से घूम-घूमकर बाढ़ प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से खाने के पैकेट नाव से भेजने की व्यवस्था पर जोर दिया, जिससे वह उन लोगों तक पहुंच सके जो पूरी तरह से पानी में फंसे हुए हैं।

वृंदावन में बाढ़ की स्थिति बहुत विकट है। निचले इलाकों में पानी भर चुका है, और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप हो चुकी हैं। लोग छतों पर शरण लिए हुए हैं और प्रशासनिक सहायता की भी सीमाएं नजर आ रही हैं। ऐसे में संत समाज और समाजसेवियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रेमानंद महाराज(premanand ji maharaj) के इस सेवा कार्य की वृंदावन सहित पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। उनके शिष्यों ने बताया कि यह सेवा कार्य आगे भी जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर और अधिक सहायता सामग्री मथुरा व आस-पास के क्षेत्रों से मंगवाई जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य सिर्फ अपना जीवन जीना नहीं, बल्कि दूसरों के दुःख में सहभागी बनना है। जब तक हम दूसरों के कष्ट में सहभागी नहीं बनते, तब तक मानवता अधूरी है। उन्होंने कहा कि संकट के इस समय में सभी भारतीयों को एकजुट होकर एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए।

वृंदावन में संत समाज की यह पहल एक मिसाल बनकर उभरी है, जिससे यह संदेश जाता है कि धर्म और सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। बाढ़ की इस त्रासदी में प्रेमानंद महाराज(premanand ji maharaj) और उनके शिष्यों द्वारा किए जा रहे कार्य निश्चित ही समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।