politics of uttarakhand: उत्तराखंड की राजनीति में फिर गरमाई सियासतpolitics of uttarakhand: उत्तराखंड की राजनीति में फिर गरमाई सियासत

politics of uttarakhand: उत्तराखंड की राजनीति में फिर गरमाई सियासत

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ही सियासी पारा चढ़ने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की एक टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को लेकर जो तंज कसा, उस पर अब राज्य सरकार के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने तीखा पलटवार किया है। सुबोध उनियाल ने न केवल रावत की बातों को खारिज किया, बल्कि उन्हें “दुष्ट” कहने से भी परहेज़ नहीं किया।

दरअसल, बीते 12 अक्टूबर को हरीश रावत मुन्स्यारी से लौटते समय हल्द्वानी के गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का निरीक्षण कर रहे थे। वहीं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने एक सवाल के जवाब में भगत सिंह कोश्यारी को लेकर चुटकी ली। जब पत्रकारों ने पूछा कि, क्या 2027 के चुनाव में कोश्यारी एक बार फिर सक्रिय हो रहे हैं, तो रावत ने मजाकिया लहजे में कहा, “जब बच्चों में खुसरफुसर होती है तो ये उन बुजुर्गों में हैं जो लोगों से कहते हैं कि क्या मेरी शादी की बात चल रही है?”

रावत ने यह भी कहा कि उन्हें ढोल बजाना बहुत अच्छे से आता है और 2027 के चुनाव में यही काम रहेगा। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसके बाद भाजपा खेमे से प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।

हरीश रावत की इस टिप्पणी पर अब राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने तीखा जवाब दिया है। हल्द्वानी स्थित वन प्रशिक्षण संस्थान परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके और हरीश रावत के बीच कभी भी अच्छे संबंध नहीं रहे, भले ही वे एक ही पार्टी में थे। उन्होंने कहा, “मेरा कभी भी दुष्टों से साथ नहीं रहा और हरीश रावत को अब राम भजन करना चाहिए। उनकी उम्र अब वानप्रस्थ की हो चुकी है।”

सुबोध उनियाल ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले ही रावत को 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी। लेकिन रावत ने यह सलाह नहीं मानी और दोनों ही चुनावों में हार का सामना किया। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें पहले भी कहा था कि अब राजनीति से विराम ले लेना चाहिए, लेकिन उन्होंने नहीं सुना और जनता ने अपना निर्णय दे दिया।”

सुबोध उनियाल की ये टिप्पणी केवल राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है जिसमें पार्टी विपक्ष को लगातार घेर रही है, विशेषकर हरीश रावत जैसे अनुभवी नेताओं को। भाजपा यह संकेत देना चाहती है कि कांग्रेस नेतृत्व अब बूढ़ा हो चला है और जनता उनसे ऊब चुकी है।

वहीं, आपको बता दें कि हरीश रावत ने कोश्यारी पर तंज कसते हुए एक पुरानी घटना की भी याद दिलाई थी जिसमें 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान कोश्यारी ने उन्हें “एकलु वानर” कहा था। अब रावत के ताजा बयान को उसी की प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

सिर्फ बयानबाज़ी तक ही मामला सीमित नहीं है। हरीश रावत ने पेपर लीक मामलों पर भी राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया था कि उत्तराखंड में सरकारी परीक्षाओं में हो रही धांधलियों के लिए खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिम्मेदार हैं। रावत ने कहा, “मुख्यमंत्री खुद इस नाटक के मुख्य एक्टर हैं। पेपर लीक होते रहेंगे, आयोग बार-बार नया कैलेंडर लाता रहेगा और युवा लगातार ठगा महसूस करते रहेंगे।”

रावत के इस बयान से भाजपा सरकार पर विपक्षी दबाव और बढ़ गया है। कांग्रेस इस मुद्दे को युवाओं के बीच ले जाकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।

2027 के चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन जिस तरह से बयानबाज़ी का स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है, उससे साफ है कि दोनों दलों के बीच टकराव आने वाले समय में और तेज़ होगा। व्यक्तिगत टिप्पणियों और पुराने विवादों को हवा देकर नेता एक बार फिर चुनावी जमीन तैयार करने में जुट गए हैं।

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