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Politics: बीती शाम पुणे पुलिस ने एक इनोवा गाड़ी को पकड़ा, जिसमें बड़ी मात्रा में नकदी भरी हुई थी। यह कार्रवाई उस समय की गई जब चुनावी माहौल में हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। पुलिस यह जांच कर रही है कि बरामद रुपये किसके थे और उन्हें कहां ले जाया जा रहा था।
शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने इस मामले में आरोप लगाया है कि ये रुपये एकनाथ शिंदे के गुट के लिए भेजे जा रहे थे। उन्होंने कहा कि यह राशि उन लोगों के लिए पहली किस्त थी जो चुनाव जीतने के लिए पैसे का वितरण कर रहे थे। राउत ने आगे कहा कि शिंदे ने अपने लोगों से वादा किया है कि उन्हें जीतने के लिए 50-50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, और यह 15 करोड़ की पहली किस्त थी।Politics
पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस संबंध में कहा है कि चुनावों के चलते हर गाड़ी की छानबीन की जा रही है। सोमवार को मुंबई-बेंगलूरू हाइवे पर खेड़ शिवपुर टोल नाका पर नाकाबंदी की गई थी, जहां एक गाड़ी से पांच करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई। पुलिस ने कार में मौजूद चार लोगों से पूछताछ की और बरामद नकदी को आयकर विभाग को सौंप दिया।Politics
इस घटना के बाद सियासत गर्म हो गई है। संजय राउत ने कहा कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के विधायक की गाड़ी से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी की बरामदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि घटनास्थल पर दो गाड़ियां थीं, जिनमें कुल 15 करोड़ रुपये थे, लेकिन एक गाड़ी को छोड़ दिया गया क्योंकि वहां ड्यूटी पर मौजूद इंस्पेक्टर पहले से ही राज्य के 150 विधायकों की सेवा में था।Politics
सीट बंटवारे को लेकर महा विकास अघाड़ी (एमवीए) में स्थिति तनावपूर्ण है। शिंदे गुट ने कहा है कि उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना और कांग्रेस के बीच भारी लड़ाई चल रही है। हालांकि, संजय राउत ने इस बात से साफ इनकार किया है कि कांग्रेस की वजह से सीट बंटवारे में देरी हो रही है। उनका कहना है कि कांग्रेस आलाकमान के फैसले दिल्ली में होते हैं, और इसमें कोई लेटलतीफी नहीं है।Politics
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के नेता डॉ. राजू वाघमारे ने कहा है कि कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बीच बहुत लड़ाई है। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) को लगता है कि वे अधिक सीटें जीत सकते हैं और इसके लिए वे कांग्रेस और एनसीपी के सहयोगियों की सीटें भी ले सकते हैं। वाघमारे ने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र के लोग उन्हें असली शिवसेना मानते हैं, और इसलिए शिवसेना (यूबीटी) के लिए कोई सहानुभूति नहीं है।Politics
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