सीकर, राजस्थान। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 के बीच सीकर जिले से एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। यहां पुलिस विभाग में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद पर तैनात सुल्तान सिंह बराल ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा है। खास बात यह है कि उनकी पुलिस सेवा के करीब 13 साल अभी बाकी थे, लेकिन उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का फैसला किया। अब कांग्रेस ने उन्हें सीकर जिला परिषद के वार्ड नंबर 40 से अपना उम्मीदवार बनाया है।
राणोली थाने में तैनात थे सुल्तान सिंह
सुल्तान सिंह बराल सीकर जिले के राणोली पुलिस थाने में सहायक उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। पुलिस विभाग में रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
उनकी पोस्टिंग सीकर के कोतवाली थाने और राणोली सहित कई थानों में रही है। हाल ही में वे प्रसिद्ध जीणमाता मेले में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी संभाल रहे थे।
इसी दौरान उन्होंने पुलिस सेवा से अलग होकर चुनावी राजनीति में उतरने का निर्णय लिया।
13 साल की नौकरी बाकी, फिर भी लिया VRS
सुल्तान सिंह के फैसले की सबसे खास बात उनकी शेष सेवा अवधि है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी सेवानिवृत्ति में करीब 13 साल बाकी थे। इसके बावजूद उन्होंने पुलिस विभाग को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन सौंप दिया।
गुरुवार को उन्होंने सीकर के पुलिस अधीक्षक संजीव नैन के समक्ष VRS के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। पुलिस अधीक्षक ने उसी दिन उनका आवेदन स्वीकार कर लिया।
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मंजूर होने के बाद सुल्तान सिंह को पुलिस की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही उनके सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रवेश का रास्ता साफ हो गया।
कांग्रेस ने वार्ड नंबर 40 से बनाया उम्मीदवार
पुलिस सेवा छोड़ने के बाद सुल्तान सिंह बराल कांग्रेस से जुड़ गए। पार्टी ने उन्हें सीकर जिला परिषद के वार्ड नंबर 40 से प्रत्याशी घोषित किया है।
16 अक्टूबर को जारी कांग्रेस की उम्मीदवार सूची में भी वार्ड नंबर 40 से सुल्तान सिंह का नाम दर्ज है। सूची के अनुसार, उनके पिता का नाम भागीरथ मल है और उनका पता ढाणी पिपलावाली, बराल, तहसील सीकर बताया गया है।
सीकर जिला परिषद में कुल 49 वार्ड हैं। कांग्रेस ने इनमें से 48 वार्डों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की है, जबकि वार्ड नंबर 20 पर उम्मीदवार का नाम लंबित रखा गया है।
कौन हैं सुल्तान सिंह बराल? परिवार का राजनीति से पुराना नाता
सुल्तान सिंह बराल का परिवार पहले से स्थानीय राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता भागीरथमल ग्राम पंचायत जुराठड़ा में वार्ड पंच रह चुके हैं। इसके अलावा उनके छोटे भाई भी वार्ड पंच रह चुके हैं और सरपंच का चुनाव लड़ चुके हैं।
इस तरह सुल्तान सिंह भले ही पहली बार पुलिस सेवा छोड़कर सक्रिय चुनावी राजनीति में आए हों, लेकिन उनके परिवार का पंचायती राज व्यवस्था से पुराना संबंध रहा है।
पुलिस की जिम्मेदारी से ग्रामीण विकास की राजनीति तक
पुलिस विभाग में सुल्तान सिंह की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की थी। अब जिला परिषद चुनाव में उन्हें ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर जनता के सामने अपनी योजनाएं रखनी होंगी।
जिला परिषद सदस्यों की भूमिका ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं से जुड़ी होती है।
ऐसे में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, ग्रामीण बुनियादी ढांचा और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं।
सुल्तान सिंह के सामने चुनौती होगी कि वे पुलिस सेवा के अपने अनुभव को स्थानीय विकास से जुड़े प्रस्तावों और जनसंपर्क के माध्यम से किस तरह प्रस्तुत करते हैं।
वार्ड नंबर 40 के चुनाव पर टिकी निगाहें
राजस्थान में पंचायती राज चुनावों की प्रक्रिया के बीच सुल्तान सिंह बराल का नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ने का फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया है। हालांकि, नामांकन और अन्य चुनावी औपचारिकताओं की अंतिम स्थिति संबंधित निर्वाचन रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
अब वार्ड नंबर 40 में चुनावी मुकाबला किन उम्मीदवारों के बीच होगा और मतदाता किन मुद्दों को प्राथमिकता देंगे, यह आगामी चुनावी प्रक्रिया में सामने आएगा।
सुल्तान सिंह बराल का पुलिस सेवा से राजनीति तक का सफर इस चुनाव की चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है। लेकिन उनकी नई राजनीतिक पारी की दिशा का फैसला वार्ड नंबर 40 के मतदाता ही करेंगे।
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