PM मोदी के कड़े तेवर से बैकफुट पर आए ‘ट्रंप’!PM मोदी के कड़े तेवर से बैकफुट पर आए ‘ट्रंप’!

PM मोदी के कड़े तेवर से बैकफुट पर आए ‘ट्रंप’!

अमेरिका और भारत के बीच हाल के दिनों में टैरिफ और रूस से तेल खरीद को लेकर कड़वाहट साफ दिखाई दे रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर बार-बार निशाना साधते हुए ऊंचे टैरिफ लगाने तक की बात कर दी थी।

इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक कह डाला कि भारत और रूस को अमेरिका ने चीन के हाथों खो दिया है। लेकिन अचानक ही ट्रंप का सुर बदल गया और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘अच्छा दोस्त’ बताते हुए रिश्तों को खास बताया है

हाल ही में मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विशेष संबंध हैं और घबराने की कोई बात नहीं है। उन्होंने मोदी को शानदार प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि, भले ही उन्हें भारत के कुछ फैसले पसंद न आए हों, लेकिन भारत-अमेरिका की दोस्ती बनी रहेगी। ट्रंप ने ये भी माना कि भारत रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहा है और ये अमेरिका के लिए निराशाजनक है।

इसके बावजूद उन्होंने साफ किया कि वे हमेशा मोदी के दोस्त रहेंगे।

ट्रंप का ये बयान उस समय आया जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के पाले में धकेल दिया है। दरअसल, हाल ही में SCO सम्मेलन में मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की तस्वीरों ने वैश्विक राजनीति में बड़ा संदेश दिया था

ट्रंप के बदले सुर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि, भारत और अमेरिका के रिश्ते बेहद सकारात्मक, दूरदर्शी और वैश्विक महत्व के हैं। मोदी ने ट्रंप की भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि, वे भी अमेरिका के साथ इसी तरह की दोस्ती को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

दरअसल, टैरिफ विवाद के बीच भी दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के लिए ‘दोस्ती का राग’ कायम रखा है।

ट्रंप का ये बदला हुआ रुख, कई सवाल खड़े करता है, आखिर जो नेता कुछ ही दिन पहले भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था, वही अब दोस्ती की बात क्यों करने लगा? विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे कई रणनीतिक और राजनीतिक कारण हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि, पीएम मोदी ने ट्रंप के फोन कॉल नहीं उठाए दरएसल एक जर्मन मीडिया रिपोर्ट ने दावा किया कि, टैरिफ विवाद के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को चार बार फोन किया, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री ने कॉल रिसीव नहीं किया। ये संदेश अमेरिका के लिए बेहद स्पष्ट था कि भारत झुकने वाला नहीं है।

वहीं चीन दौरे और SCO शिखर सम्मेलन में भारत की सक्रियता को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। भारत ने रूस और अमेरिका के बीच खिंचाव के बावजूद चीन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस बैठक में मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग एक साथ मंच साझा करते दिखे।

इसके साथ ही मोदी ने सितंबर के अंत में होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र में शामिल न होने का फैसला लिया है। जिसकी जगह विदेश मंत्री जयशंकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
भारत सरकार ने हाल ही में जीएसटी स्ट्रक्चर में बड़ा सुधार किया है।

चार स्लैब की जगह अब केवल दो प्रमुख दरें होंगी, 5% और 18%। इसके अलावा हानिकारक वस्तुओं पर 40% की दर तय की गई है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ये कदम भारत की अर्थव्यवस्था को सरल और मज़बूत बनाने की दिशा में अहम है। यही वजह है कि टैरिफ विवाद के बीच भी भारत आत्मविश्वास से खड़ा रहा और अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर न होने का संदेश दिया।

भारत ने टैरिफ दबाव के आगे झुकने से इनकार किया, रूस से तेल खरीदना जारी रखा और साथ ही चीन और रूस के साथ मंच साझा करके अमेरिका को साफ संकेत दे दिया कि अगर दबाव ज्यादा बढ़ा तो भारत के पास और विकल्प हैं।

फिलहाल ट्रंप का बदला सुर ये दिखाता है कि, अमेरिका को भी समझ आ गया है कि भारत को दबाव से नहीं, बल्कि सहयोग से ही अपने साथ रखा जा सकता है। और यही कारण है कि, टैरिफ घमासान के बीच भी दोनों नेता दोस्ती का राग छेड़े हुए हैं।