Categories: देश

क्वालिटी टेस्ट में फेल हुईं पैरासिटामोल और BP की दवा, अस्पतालों में इस्तेमाल पर लगी रोक

नागपुर
नागपुर में महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की क्वालिटी टेस्ट में दो आम इस्तेमाल होने वाली दवाएं पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की एक दवा फेल हो गई हैं. इसके बाद सरकारी अस्पतालों ने इनको मरीजों को देने पर रोक लगा दी है औरस्टॉक को वापस मंगा लिया है. ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को सप्लाई की गई थीं. इस घटना ने दवाओं की क्वालिटी और उन्हें लेने से पहले टैबलेट की जांच करने की अहमियत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, FDA ने रूटीन टेस्टिंग के दौरान सैंपल लिए थे. टेस्ट के नतीजों के बाद प्रभावित स्टॉक का डिस्ट्रीब्यूशन रोकने और उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए. इन दवाओं में पैरासिटामोल 500 mg और टेल्मिसार्टन 40 mg शामिल थीं, जिसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दवाएं इंदौर की एक दवा कंपनी ने बनाई थी। 

1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं

TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल को FDA से सूचना मिलने के बाद लगभग 1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं. ये टैबलेट जुलाई में सप्लाई की गई थीं और टेस्ट के नतीजे मिलने के बाद अस्पताल ने इनका मरीजों को देने पर रोक लगा दी है. जिन पैरासिटामोल टैबलेट की बात हो रही है, उन्हें 'Parasev 500' के नाम से बेचा गया था और वे बैच नंबर PTTC-108 की थीं. सैंपल के ज़रूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा न उतरने के बाद, एहतियात के तौर पर बाकी स्टॉक वापस मंगा लिया गया. दोनों अस्पतालों ने कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा टैबलेट खरीदी थीं, जबकि अकेले GMCH के पास वापस मंगाए जाने के समय प्रभावित स्टॉक में से लगभग 25,000 टैबलेट मौजूद थीं। 

दूसरी दवा टेल्मिसार्टन 40 mg थी, जो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है. प्रभावित बैच की पहचान CHPLT 416 के तौर पर की गई. टैबलेट पर दिखने वाले दागों के अलावा, यह दवा डिसोल्यूशन टेस्ट में भी फेल हो गई. यह जरूरी है क्योंकि दवा के सही ढंग से काम करने के लिए टैबलेट का अपना एक्टिव इंग्रीडिएंट ठीक से रिलीज करना ज़रूरी होता है. अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे इसका वितरण रोक दें और वार्ड व फार्मेसी से उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लें.इन दवाओं को खराब क्लालिटी का बताया गया है, हालांकि ये नकली नहीं है। 

घटिया और नकली दवा में होता है अंतर
घटिया दवा एक असली दवा होती है जो जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतरती. इसमें दवा के रूप-रंग, असर, शुद्धता, घुलने की क्षमता, स्टेबिलिटी या क्वालिटी से जुड़े दूसरे पैरामीटर्स में कमी हो सकती है, 
वहीं, नकली दवा में गलत इंग्रीडिएंट हो सकता है, एक्टिव इंग्रीडिएंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकता है, या फिर उसकी पहचान या बनाने वाली कंपनी के बारे में गलत जानकारी हो सकती है। 

News Desk

Recent Posts

टेकबॉल में गोल्ड का सपना टूटा, सेमीफाइनल में हारीं क्विम्सी डिसूजा; ब्रॉन्ज की उम्मीद बरकरार

नई दिल्ली  भारत की क्विम्सी डिसूजा एशियन गेम्स की टेकबॉल महिला सिंगल्स के सेमीफाइनल में…

1 hour ago

वायुसेना की ताकत बढ़ी, तेजस विमानों का बेड़ा पूरा; स्वदेशी जेट से बढ़ेगी क्षमता

नई दिल्ली हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने शुक्रवार को भारतीय वायुसेना को पूरी तरह स्वदेशी…

2 hours ago

उल्टी के डर से महिला ने कराया अबॉर्शन, सुनाई प्रेग्नेंसी की हैरान करने वाली कहानी

लंदन  प्रेग्नेंसी की खबर सुनकर ज्यादातर कपल्स खुश होते हैं. लंबे समय से बच्चे का…

3 hours ago

इजरायली हमले में क्षतिग्रस्त परमाणु सेंटर को तीसरी बार बना रहा ईरान, तेजी से चल रहा काम

तेहरान  ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में स्थित तालेगान-2 लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय केंद्र रहा…

3 hours ago

PM Kisan 24वीं किस्त से पहले कर लें ये 3 काम, तभी खाते में आएंगे ₹2,000

 नई दिल्ली आप भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे…

4 hours ago

Oscars 2027 के लिए भारत की ओर से चुनी गई मराठी फिल्म, IMDb पर मिली 8.9 की रेटिंग

मुंबई  फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने उस फिल्म के नाम का ऐलान कर दिया…

4 hours ago