Pakistan International Airline Sold: पाकिस्तान की एयरलाइन बिक गई!
आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अब अपने राष्ट्रीय प्रतीकों को संभाल नहीं पा रहा है। एक समय दुनिया की शान रही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) अब निजी हाथों में चली गई है। लगातार घाटे और कर्ज के दबाव में डूबी शहबाज शरीफ सरकार ने मंगलवार को PIA की बिक्री पूरी कर ली, जिससे देश की आर्थिक बेबसी और साफ़ झलक गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद में आयोजित सेरेमनी के दौरान सरकार ने PIA के प्राइवेटाइजेशन प्रोसेस को औपचारिक रूप से संपन्न किया। बिक्री प्रक्रिया में आरिफ हबीब, लकी सीमेंट और एयरब्लू जैसी तीन निजी कंपनियों ने हिस्सा लिया। सीलबंद बोलियों (sealed bids) को पारदर्शिता के तहत एक बॉक्स में जमा कराया गया, जिसे बाद में लाइव प्रसारण के दौरान सार्वजनिक रूप से खोला गया।
जब बोली प्रक्रिया शुरू हुई, तो आरिफ हबीब ग्रुप ने बाकी सभी दावेदारों को पीछे छोड़ दिया। सरकार द्वारा तय रेफरेंस प्राइस 100 अरब रुपये रखा गया था, लेकिन आरिफ हबीब ग्रुप ने इसे पार करते हुए 135 अरब रुपये की सबसे बड़ी बोली लगाई। मुकाबले में लकी सीमेंट ने कड़ा रुख दिखाया, लेकिन आखिरकार आरिफ हबीब की बोली स्वीकार कर ली गई।
जानकारी के अनुसार, सरकार ने इस डील में PIA की 75% हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव रखा था। सफल बोलीदाता के पास अब 90 दिनों के भीतर बाकी की 25% हिस्सेदारी खरीदने का विकल्प होगा। अनुबंध के अनुसार, इस बिक्री से प्राप्त राशि का 92.5% हिस्सा एयरलाइन के पुनर्निर्माण में निवेश किया जाएगा, जबकि 7.5% हिस्सा सीधे पाकिस्तान सरकार को स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही, नए इन्वेस्टर्स को अगले पांच वर्ष के भीतर 80 अरब रुपये का अतिरिक्त निवेश करना अनिवार्य होगा।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस डील को पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय लेनदेन करार दिया। उन्होंने कैबिनेट बैठक में इस पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्राइवेटाइजेशन कमीशन और सरकारी अधिकारियों की सराहना की। प्रधानमंत्री के मुताबिक, “यह कदम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की दिशा में आवश्यक था।”
हालांकि, आलोचकों का मानना है कि यह कदम देश की मजबूरी का प्रतीक है। कभी दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइंस में गिनी जाने वाली PIA अब कर्ज, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की वजह से अपनी पहचान खो चुकी है। जहां 1970-80 के दशक में PIA को अन्य एयरलाइंस के लिए मॉडल माना जाता था, वहीं अब इसके विमान तक उड़ान योग्य स्थिति में नहीं बचे। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एयरलाइन को अरबों रुपये का घाटा हुआ था।

गौरतलब है कि यह सरकार का PIA की बिक्री का दूसरा प्रयास था। इससे पहले पिछले वर्ष भी कंपनी को बेचने की योजना बनी थी, लेकिन खरीदारों की गैर-मौजूदगी और कम प्रस्तावों के चलते यह प्रक्रिया रुक गई थी। इस बार शहबाज शरीफ सरकार ने पूरे बिडिंग प्रोसेस को लोकल टेलीविज़न पर लाइव प्रसारित किया, ताकि पारदर्शिता को लेकर कोई सवाल न उठे।

आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डील पाकिस्तान के लिए “आर्थिक स्थिरता का नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई” का परिणाम है। IMF और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से लगातार क़र्ज लेने के बावजूद देश की हालत नहीं सुधर रही। अब हालत यह है कि सरकारी संपत्तियां बेचकर नकदी जुटाना ही सरकार की रणनीति बन चुकी है।
PIA की बिक्री से पाकिस्तान को अस्थाई राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन उद्योग जगत का मानना है कि जब तक देश अपनी आर्थिक नीतियों और संस्थागत ढांचे में सुधार नहीं लाता, तब तक इस तरह की डील्स केवल कर्ज का बोझ बढ़ाने का जरिया ही बनेंगी।

