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Defence Deal: F-35 और Su-57 नहीं, इस घातक फाइटर जेट पर आई बड़ी खुशखबरी; चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन

बेंगलुरु 

 चीन और पाकिस्‍तान जैसे दुश्‍मन देशों की धड़कनों की पहरेदारी करने के लिए भारत ने कई ठोस कदम उठाए हैं. इसमें राफेल फाइटर जेट का बेड़ा तैयार करना प्रमुख रणनीति है. इस दिशा में बड़ी खुशखबरी सामने आई है. फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट डील पर भारत को डिटेल्‍ड प्रोपोजल सौंपा है. तकरीबन 3.25 लाख करोड़ के इस रक्षा सौदे के तहत 94 राफेल लड़ाकू विमान का उत्‍पादन भारत में करने का प्रस्‍ताव है. डील के तहत 20 फाइटर जेट फ्लाई-बाई कंडीशन (यानी पूरी तरह से तैयार) में भारत को मिलेंगे. हालांकि, फाइटर जेट का ब्रेन कहा जाने वाला सोर्स कोड और इंटरफेस कंट्रोल डॉक्‍यूमेंट (ICD) साझा करने पर सहमति बनी है या नहीं, इसपर जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। 

इंडियन एयरफोर्स की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भारत को लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव का विस्तृत तकनीकी और कमर्शियल डॉक्‍यूमेंट्स सौंपा है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, फ्रांसीसी पक्ष ने भारत की ओर से जारी लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) के जवाब में यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया है. रक्षा मंत्रालय का अधिग्रहण विंग और भारतीय वायुसेना द्वारा विस्तार से समीक्षा की जा रही है. इस प्रस्ताव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बड़े पैमाने पर भारत में स्थानीय मैन्‍यूफैक्चरिंग और स्वदेशीकरण पर जोर है. प्रस्ताव के तहत 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ मिसाइल निर्माता MBDA, इंजन निर्माता सफ्रान और थेल्स जैसी प्रमुख कंपनियां भारतीय औद्योगिक साझेदारों के साथ मिलकर उत्पादन करेंगी। 

भारत के फोकस पर क्‍या
भारत इस प्रस्ताव का विशेष रूप से इस आधार पर मूल्यांकन कर रहा है कि राफेल विमानों में स्वदेशी हथियारों खासकर अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल के विभिन्न संस्करणों के इंटीग्रेशन और स्वदेशी उपकरणों को कितनी प्राथमिकता दी गई है. रक्षा मंत्रालय चाहता है कि इस सौदे में अधिकतम स्वदेशी सामग्री शामिल हो, ताकि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी गति मिल सके. सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना से भारतीय उद्योग को करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के कारोबारी अवसर मिलने की संभावना है. टाटा समूह, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) सहित कई भारतीय रक्षा एवं विनिर्माण कंपनियां इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकती हैं. इससे रक्षा उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और रोजगार सृजन को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 

भारत ने इसी वर्ष मई में 114 राफेल विमानों की गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (जी-टू-जी) खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक एलओआर जारी किया था. भारतीय वायुसेना के घटते स्क्वाड्रन बल, पुराने रूसी मूल के मिग लड़ाकू विमानों की चरणबद्ध विदाई और स्वदेशी एलसीए मार्क-1A तथा LCA मार्क-2 कार्यक्रमों में देरी को देखते हुए यह खरीद अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वर्तमान में भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं. यदि 114 नए विमानों का सौदा अंतिम रूप लेता है तो देश में राफेल विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी. इसके अलावा भारतीय नौसेना भी समुद्री सुरक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए 31 अतिरिक्त राफेल खरीदने की इच्छा जता चुकी है. ऐसा होने पर भारत के पास 200 से अधिक राफेल लड़ाकू विमान हो सकते हैं। 

2024 में डिटेल्‍ड स्‍टडी
उल्लेखनीय है कि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में वर्ष 2024 में भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक अध्ययन किया गया था. इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए. करीब पांच महीने पहले रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने भारतीय वायुसेना के 114 राफेल विमानों की खरीद संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. अब फ्रांस के विस्तृत प्रस्ताव पर तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद इस बहुप्रतीक्षित रक्षा सौदे पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। 

Rupesh Jha

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