New District Hansi: क्या ‘हांसी’ को नया जिला बनाना पड़ेगा भारी ?New District Hansi: क्या ‘हांसी’ को नया जिला बनाना पड़ेगा भारी ?

New District Hansi: क्या ‘हांसी’ को नया जिला बनाना पड़ेगा भारी ?

हरियाणा की ऐतिहासिक नगरी हांसी अब राज्य का 23वां जिला बन गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में इस फैसले को मंजूरी मिल गई है… अगले एक हफ्ते के भीतर इसका औपचारिक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। दिलचस्प बात ये है कि इस प्रस्ताव को केवल दो दिन में कैबिनेट की हरी झंडी मिल गई, जिससे साफ है कि सरकार इसे एक बड़े राजनीतिक कदम के रूप में देख रही है।

हांसी जिले में हांसी और नारनौंद विधानसभा क्षेत्रों के करीब 110 गांव शामिल होंगे। नए जिले में दो उपमंडल, तीन तहसीलें, एक उप-तहसील और तीन ब्लॉक होंगे। स्थानीय प्रशासनिक ढांचे को लेकर तैयारियां तेज हैं। विधायक विनोद भयाना के मुताबिर, शुरुआती दौर में डीसी कार्यालय उपमंडल भवन में ही चलेगा और बाद में इसके लिए स्थायी भवन का निर्माण किया जाएगा। अन्य विभागों के कार्यालय भी जल्द ही स्थापित किए जाएंगे।

हांसी को जिला बनाए जाने से हिसार रेंज में फिर से पांच जिले शामिल हो गए हैं। साल 2017 में भिवानी को रोहतक रेंज में स्थानांतरित किया गया था, जिससे हिसार रेंज में जिलों की संख्या चार रह गई थी। अब हांसी को अलग जिले के रूप में गठित करने के बाद हिसार प्रशासनिक रूप से फिर से मज़बूत रेंज बन गया है।

राज्य सरकार ने इसके लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई थी। समिति को बवानीखेड़ा के 22 पंचायतों से रेज़ॉल्यूशन मिला था, जिनमें ग्रामीणों ने भिवानी की जगह हांसी में शामिल होने की मांग की। ये मांग कई सालों से लंबित थी, जिसे अब जाकर मंजूरी मिली है।

हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में हर बार जब किसी मुख्यमंत्री ने एक नया जिला बनाया है, उसके अगले चुनाव में उन्हें बहुमत से चूकना पड़ा। दिलचस्प पैटर्न ये है कि, बावजूद इसके, नए जिले वाले क्षेत्र में उस पार्टी का प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।

सबसे पहले बात करते हैं, भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दौर की, तो

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान मेवात (2005) और पलवल (2008) जिले बनाए। इन इलाकों में कांग्रेस लंबे समय तक मजबूत रही। 2009 में उन्हें सरकार बनाने के लिए सहयोगियों की जरूरत पड़ी, लेकिन दक्षिण हरियाणा के अहीरवाल और मेवात बेल्ट से मिली मजबूत वोटिंग ने दोबारा सीएम बनने का रास्ता साफ किया। भले ही बाद में मेवात का नाम बदलकर नूंह रखा गया, लेकिन कांग्रेस आज भी इस क्षेत्र में मजबूत है। हाल में ही नूंह जिले की तीनों विधानसभाओं में पार्टी ने जीत दर्ज की, जिनमें फिरोजपुर झिरका सीट पर रिकॉर्ड वोटों से विजय मिली।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने साल 2016 में चरखी दादरी को भिवानी से अलग कर जिला बनाया। ये मांग कई दशकों से लंबित थी। नया जिला बनने के बावजूद 2019 में भाजपा को दादरी सीट से हार का सामना करना पड़ा…. पर 2024 के चुनावों में भाजपा ने यहां वापसी की। सुनील सांगवान के जीतने से ये स्पष्ट है कि जिले के गठन का असर धीरे-धीरे पार्टी के पक्ष में गया। पास की बाढ़ड़ा सीट भी भाजपा के खाते में रही।

वहीं, हरियाणा के प्रख्यात नेता चौधरी देवीलाल ने 1989 में एक ही दिन में चार जिले…  कैथल, पानीपत, रेवाड़ी और यमुनानगर बनाए थे। ये एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक प्रयोग था। इन जिलों के माध्यम से उन्होंने अहीर, जाट और अन्य समुदायों में अपनी पकड़ और पार्टी की जड़ें मजबूत कीं। हालांकि 1991 के चुनावों में उनकी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई, मगर रेवाड़ी और कैथल क्षेत्र में देवीलाल परिवार का प्रभाव आज भी बरकरार है।

वहीं चौधरी बंसीलाल ने भिवानी, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, सिरसा, फतेहाबाद और झज्जर जिलों का गठन किया था। इन जिलों में विकास कार्यों ने उनकी लोकप्रियता बढ़ाई और भिवानी क्षेत्र दशकों तक उनकी राजनीतिक भूमि बना रहा।

जबकि चौधरी भजनलाल ने हरियाणा में फरीदाबाद और पंचकूला जिले बनाए। खासतौर पर पंचकूला को जिले का दर्जा देकर उन्होंने आधुनिक शहरी विकास की सोच को आगे बढ़ाया। हालांकि 1996 में उनकी पार्टी सत्ता में नहीं आ सकी, लेकिन पंचकूला क्षेत्र में उनके परिवार का प्रभाव लगातार बना रहा। ये इसी रणनीति का नतीजा है कि उनके बेटे चंद्रमोहन ने 2024 में इसी विधानसभा से जीत हासिल की।

अब जब हांसी को जिला घोषित किया गया है, तो इसे भाजपा का मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे आसपास की विधानसभा सीटों, नारनौंद, हिसार, बरवाला, बवानीखेड़ा और नलवा पर भाजपा को लाभ मिल सकता है। नारनौंद को छोड़कर बाकी सभी सीटें फिलहाल भाजपा के कब्जे में हैं। नया जिला बनने से इन क्षेत्रों में स्थानीय विकास की उम्मीद बढ़ेगी, जिससे पार्टी की जन-स्वीकृति को मजबूती मिल सकती है।

हरियाणा के इतिहास में हर बार नए जिले दो कारणों से बनाए गए… प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए, ताकि जनता को ज़मीनी स्तर पर सुविधाएं मिल सकें।

राजनीतिक लाभ पाने के लिए, ताकि उस क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत की जा सके। हांसी के मामले में ये दोनों ही पहलू नजर आते हैं। एक ओर, क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है, जिससे जनता में संतोष और गर्व की भावना है। दूसरी ओर, इसे आगामी चुनाव से पहले भाजपा की रणनीतिक पहल भी माना जा रहा है।

हरियाणा में आज तक किसी मुख्यमंत्री ने जिला बना कर अगले चुनाव में पूर्ण बहुमत दोबारा हासिल नहीं किया। ये एक दिलचस्प सियासी संयोग है… बंसीलाल, भजनलाल, देवीलाल, हुड्डा और मनोहर लाल… सभी इस पैटर्न में फिट बैठते हैं। अब देखना ये होगा कि नायब सिंह सैनी के लिए ये फैसला राजनीतिक वरदान साबित होता है, या इतिहास खुद को दोहराता है।

फिलहाल इतना निश्चित है कि हांसी को जिला बनाना केवल भूगोल नहीं, बल्कि हरियाणा की राजनीतिक भू-संरचना को भी नया आकार देने वाला कदम है।