बिहार में ‘वोट अधिकार यात्रा’ से सियासी माहौल ‘गर्म’!
बिहार की सियासत में “वोट अधिकार यात्रा” ने माहौल को और गरमा दिया है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ये संयुक्त यात्रा अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के जुड़ने से और ताकतवर हो गई है। सुपौल से शुरू हुई ये यात्रा अब मिथिलांचल के उन इलाकों में प्रवेश कर चुकी है, जिन्हें लंबे समय से एनडीए का मजबूत गढ़ माना जाता है।
मिथिलांचल को बिहार का राजनीतिक दिल कहा जाता है। यहां सात बड़े जिले आते हैं- मुजफ्फरपुर, सुपौल, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी और सहरसा। इन जिलों में 60 विधानसभा सीटें हैं और ये बिहार की सत्ता की कुंजी माने जाते हैं।
2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने इन 60 सीटों में से 40 से ज्यादा पर कब्जा कर लिया था। यही वजह है कि राहुल-तेजस्वी की “वोट अधिकार यात्रा” का सबसे बड़ा लक्ष्य यही क्षेत्र बना। कांग्रेस और आरजेडी पहले इन इलाकों में मजबूत स्थिति रखते थे, लेकिन नीतीश कुमार और बीजेपी की साझेदारी ने यहां समीकरण बदल दिया।
‘वोट अधिकार यात्रा’ से ‘मिशन मिथिलांचल’ पर महागठबंधन
वहीं, प्रियंका गांधी का शामिल होना कांग्रेस और आरजेडी के लिए बड़ा सियासी संदेश है। यात्रा की शुरुआत हरतालिका तीज के दिन हुई, जब लाखों महिलाएं व्रत रखती हैं। इसे प्रतीकात्मक तरीके से महिला मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति माना जा रहा है।
प्रियंका गांधी 27 अगस्त को सीतामढ़ी स्थित जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। जिसका उद्देश्य ये दिखाना है कि कांग्रेस और आरजेडी केवल मुस्लिम मतदाताओं पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि हिंदू आस्था से भी जुड़े हैं। साथ ही, महिला मतदाताओं से सीधे संवाद करके उन्हें अपनी तरफ करने की कोशिश है।
‘राहुल-तेजस्वी-प्रियंका’ की तिकड़ी से हिलेगा NDA का गढ़!
यानी साफ है कि अगर आरजेडी-कांग्रेस को मजबूती चाहिए तो उन्हें अतिपिछड़े वर्ग और महिलाओं को लुभाना होगा। इसी रणनीति के तहत आरजेडी ने मंगनी लाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जो झंझारपुर के अतिपिछड़ा समुदाय से आते हैं।
वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में मिथिलांचल की सीटों का हाल भी जान लेते हैं…
विधानसभा चुनाव-2020 : मिथिलांचल की सीटों का हाल ()
जिला कुल सीटें NDA महागठबंधन/RJD-कांग्रेस()
मधुबनी 10 8 2
दरभंगा 10 9 1
सुपौल 6 5 1
सहरसा 4 3 1
समस्तीपुर 10 5 5
मुजफ्फरपुर 11 6 5
सीतामढ़ी 8 6 2
शिवहर 1 0 1
आपको बता दें कि, इस इलाके में 45% वोट अतिपिछड़े वर्ग (EBC) के हैं।, यादव-मुस्लिम गठजोड़ आरजेडी का आधार रहा है। ब्राह्मण और राजपूत वोट परंपरागत रूप से बीजेपी के साथ हैं। “पचपनिया” कहलाने वाले 55 जातियों का वोट बैंक यहां निर्णायक है।
वहीं, आरजेडी ने अतिपिछड़ा वर्ग को साधने के लिए मंगनी लाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। जबकि प्रियंका गांधी धार्मिक और महिला कार्ड खेल रही हैं। राहुल-तेजस्वी विकास और सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं।
मिथिलांचल की 60 सीटें बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकती हैं। अगर राहुल-तेजस्वी-प्रियंका की तिकड़ी यहां मजबूत पकड़ बना लेती है तो एनडीए के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। लेकिन ये आसान नहीं है, क्योंकि पिछली बार एनडीए ने यहां दबदबा कायम किया था।
लेकिन इस बार कांग्रेस और आरजेडी ने रणनीति बदल दी है। राहुल गांधी की लोकप्रियता और प्रियंका गांधी के करिश्मे के सहारे वे एनडीए के गढ़ में सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि, 2025 का चुनाव अलग है। नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं और बीजेपी को अकेले दम पर चुनाव जीतने की चुनौती है। अगर आरजेडी और कांग्रेस एकजुट होकर आक्रामक अभियान चलाते हैं तो समीकरण बदल सकते हैं।

