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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मकान मालिक कहां रहेगा, यह तय करने का अधिकार किराएदार को नहीं

मकान खाली कराने के मामले में इंदौर से जुड़े एक विवाद पर हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यदि मकान मालिक यह साबित कर देता है कि उसे अपने बेटे की पढ़ाई या परिवार के किसी सदस्य के बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहर में रहना आवश्यक है, तो उस शहर का चुनाव सही है या गलत, यह तय करना किराएदार का अधिकार नहीं है।

मकान मालिक और परिवार तय करेंगे जरूरत की जगह

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिवार की आवश्यकताओं के अनुसार कौन-सी जगह उनके लिए उपयुक्त है, इसका फैसला मकान मालिक और उसके परिवार को ही करना है। कोर्ट ने किराएदार की अपील खारिज करते हुए मकान खाली करने के आदेश को बरकरार रखा। मामला इंदौर के खजराना क्षेत्र की एक कॉलोनी से जुड़ा है।

मकान मालिक की ओर से अदालत में बताया गया था कि मकान वर्ष 2003 में किराए पर दिया गया था। मकान खाली कराने के लिए दायर मुकदमे में कहा गया कि मकान मालिक के पति बीपी के मरीज हैं और सेवानिवृत्ति के करीब हैं। उनका बड़ा बेटा कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई के लिए इंदौर में रहना चाहता है। वहीं, छोटा बेटा 12वीं के बाद इंदौर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहता है। ऐसे में परिवार को मकान की वास्तविक आवश्यकता है।

किराए और मकान के सौदे को लेकर भी विवाद

किराएदार ने मकान मालिक के दावे का विरोध करते हुए कहा कि मकान का किराया केवल 60 रुपये प्रतिमाह था और वह नियमित रूप से इसका भुगतान कर रहा था। किराएदार ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2009 में मकान का तीन लाख रुपये में सौदा हुआ था। उसके अनुसार, मकान की कीमत बढ़ने के बाद मकान मालिक अब बिक्री से पीछे हट रहा है।

विचारण न्यायालय ने मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता को स्वीकार करते हुए किराएदार को मकान खाली करने का आदेश दिया था। किराएदार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील की, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

किराएदार ने दलील दी कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि कंपनी सेक्रेटरी के कोर्स के लिए मकान मालिक के बेटे का इंदौर में रहना जरूरी है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने कहा कि यदि मकान मालिक और उसका बेटा यह तय करते हैं कि कोर्स के दौरान इंदौर में रहना उनके लिए सुविधाजनक है, तो यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। किराएदार यह तय नहीं कर सकता कि मकान मालिक को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए किस शहर में रहना चाहिए। कोर्ट ने किराएदार की याचिका खारिज कर दी।

Rupesh Jha

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