भारत एक ऐसी भूमि है, जहां विविधता में एकता विशिष्ट रूप से देखने को मिलती है। बीते वर्षों में ये विचार अक्सर चर्चा का केंद्र रहा है कि, भारत की पहचान आखिर क्या है… धार्मिक, सांस्कृतिक, या फिर राजनीतिक? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में इसी को लेकर एक अहम बयान दिया, जिसने राष्ट्रीय और सामाजिक संवाद को नए सिरे से छू लिया।
