हरियाणा कांग्रेस में होने जा रहे हैं बड़े बदलावहरियाणा कांग्रेस में होने जा रहे हैं बड़े बदलाव

हरियाणा कांग्रेस में होने जा रहे हैं बड़े बदलाव

 

हरियाणा में कांग्रेस पार्टी अब अपने संगठन को नया रूप देने की तैयारी में है। लंबे समय से कमजोर पड़े ढांचे को फिर से मजबूत करने के लिए पार्टी ने कॉर्पोरेट कल्चर जैसा सिस्टम लागू करने का फैसला लिया है।

अब हर महीने हरियाणा कांग्रेस के सभी जिलाध्यक्षों का परफॉर्मेंस रिव्यू होगा। जिसमें उन्हें बताना होगा कि, उन्होंने पूरे महीने में क्या काम किया और आने वाले महीने में क्या करने जा रहे हैं।

इस पर पार्टी का कहना है कि, जो नेता मेहनत करेगा और संगठन को आगे बढ़ाएगा, उसे प्रमोशन मिलेगा और जो निष्क्रिय रहेगा, उसकी कुर्सी खतरे में है।
हरियाणा कांग्रेस इस सिस्टम की शुरुआत 3 नवंबर से करने जा रही है… पहली समीक्षा बैठक चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में होगी

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इस मीटिंग में कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी बी.के. हरिप्रसाद, सह प्रभारी जितेंद्र बघेल, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, और विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा मौजूद रहेंगे। सभी 32 जिलाध्यक्षों को चिट्ठी भेज दी गई है कि, वे अपने-अपने जिलों में किए गए कामों की रिपोर्ट और अगले महीने की योजना के साथ बैठक में पहुंचे।

वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि, ये मासिक समीक्षा अब हर जिले के नेताओं के प्रमोशन का आधार बनेगी। साथ ही राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि, “पार्टी का संदेश साफ है, जो काम करेगा, वही आगे बढ़ेगा

अब हर पदाधिकारी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। संगठन अब सिर्फ नाम का नहीं रहेगा, बल्कि एक्टिव रहेगा।”

वहीं, राव नरेंद्र ने बताया कि, हर बैठक में सदस्यता अभियान, जनता से जुड़ाव, बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती और BJP के खिलाफ जनता के बीच पहुंच जैसे मुद्दों पर रिपोर्ट ली जाएगी।

इस रिव्यू सिस्टम को कांग्रेस ने ‘कॉर्पोरेट कल्चर’ की तरह डिजाइन किया है। जैसे कंपनियों में हर महीने बोर्ड मीटिंग में परफॉर्मेंस रिपोर्ट पेश की जाती है, वैसे ही अब पार्टी जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट देखेगी।

इस रिव्यू सिस्टम में ‘मुख्य प्रदर्शन सूचकांक’ तय किए गए हैं, जिसमें सदस्यता अभियान में प्रगति, जनता तक पार्टी की पहुंच, सोशल मीडिया व ग्राउंड कैंपेन, BJP सरकार की नीतियों पर जनता से संवाद और संगठन की सक्रियता और बूथ मजबूती शामिल है।

साथ ही हर बैठक में इन सभी पहलुओं की रिपोर्ट पर चर्चा होगी और कमियों को दूर करने की रणनीति बनाई जाएगी।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि यह पूरा सिस्टम राहुल गांधी का आइडिया है। दरअसल, हरियाणा में करीब 13 साल बाद कांग्रेस का संगठन पूरी तरह खड़ा हुआ है। इससे पहले तीन प्रदेश अध्यक्षों ने कोशिशें कीं, लेकिन संगठनात्मक ढांचा तैयार नहीं हो सका।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, जब लगातार देरी हो रही थी, तो राहुल गांधी ने खुद हस्तक्षेप किया और जून में नए सिरे से संगठन गठन की प्रक्रिया शुरू कराई। जिलाध्यक्षों के चयन का फॉर्मूला भी राहुल गांधी ने तय किया था, और अब मासिक समीक्षा मीटिंग का मॉडल भी उन्हीं का सुझाव है।

इस पर राहुल का मानना है कि, अगर संगठन को कॉर्पोरेट की तरह चलाया जाए यानी हर स्तर पर जवाबदेही तय हो और तो पार्टी में अनुशासन और परफॉर्मेंस दोनों बढ़ेंगे।
ये मॉडल फिलहाल हरियाणा में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है।

अगर ये सफल रहा तो कांग्रेस इसे गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में भी लागू करेगी।

पार्टी के अंदर इसे लेकर उत्साह भी है और सतर्कता भी। नेताओं का कहना है कि, इससे पार्टी में एकजुटता बढ़ेगी, कमजोर जिलाध्यक्ष सुधारेंगे या खुद ही हट जाएंगे, और जनता तक कांग्रेस का काम ज़्यादा साफ तौर पर पहुंचेगा।