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 नई दिल्ली
शेयर बाजार (Share Market) में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी-50 इंडेक्स में शामिल शेयरों में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है. करीब तीन दशक तक Nifty-50 में शामिल रहने के बाद अब आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड इससे बाहर होने वाली है, जबकि उसकी जगह बीएसई लिमिटेड की एंट्री होगी. इस बदलाव का सीधा असर विप्रो और बीएसई के शेयरों (Wipro-BSE Shares) पर देखने को मिलेगा. हालांकि, मंगलवार को मार्केट ओपन होने के साथ ही जहां विप्रा मामूली तेजी के साथ, तो बीएसई मामूली गिरावट लेकर खुला। 

सितंबर से लागू होगा ये बड़ा चेंज 
निफ्टी इंडेक्स में ये नया बदलाव अगले महीने सितंबर में देखने को मिलेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 29 सितंबर को शेयर मार्केट में कारोबार खत्म होने के बाद विप्रो का निफ्टी के साथ तीन दशक का सफर खत्म हो जाएगा यानी 30 सितंबर से Wipro इस इंडेक्स से बाहर कर दी जाएगी. NSE की ओर से बीते कारोबारी दिन सोमवार को छमाही समीक्षा के बाद ये बड़ा फैसला लिया गया है। 

Wipro के बाहर होने की वजह क्या? 
यहां ये समझ लेना जरूरी है कि आखिर क्यों लंबे समय से निफ्टी-50 इंडेक्स में शामिल दिग्गज आईटी कंपनी के विप्रो के शेयर इससे बाहर किए जा रहे हैं. तो बता दें कि विप्रो का छह महीने का फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटल काफी कम करीब 55,930 करोड़ रुपये रहा है, जबकि इसकी तुलना में BSE Ltd का फ्री-फ्लोट मार्केट कैप इन अवधि में तेजी से बढ़ते हुए 1.4 लाख करोड़ रुपये पर जा पहुंचा. ये विप्रो के आउट और बीएसई की एंट्री के लिए सबसे बड़ा कारण है। 

शेयर पर दिख सकता है असर
Wipro और BSE को लेकर आई इस खबर का सीधा असर शेयर बाजार में कारोबार के दौरान इन दोनों कंपनियों के शेयरों पर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है. मंगलवार को Share Market में कारोबार की शुरुआत होने पर विप्रो का शेयर करीब 186 रुपये पर ओपन हुआ. पिछले एक साल में इस आईटी शेयर में 23 फीसदी की गिरावट आई है, तो पांच साल में इसने निवेशकों को 40 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है। 

वहीं बीएसई का शेयर मामूली गिरावट लेकर 3565 रुपये पर कारोबार करता हुआ नजर आया. इस शेयर ने बीते एक साल में करीब 50 फीसदी का रिटर्न निवेशकों को दिया है, जबकि पांच साल में ये 2700 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है और निवेशकों की दौलत में तगड़ा इजाफा हुआ है।