Bihar Kawar Yatra: सुल्तानगंज से देवघर तक कांवड़ यात्रा का शुभारंभ
श्रावण मास का आज से शुभारंभ हो गया है,ऐसे में बिहार के सुल्तानगंज से झारखंड़ के देवघर तक की पवित्र कांवड़ यात्रा का शुभारंभ भी हो गया है। ये यात्रा विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का हिस्सा है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। श्रद्धालु सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से गंगाजल भरकर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में चढ़ाते हैं। ये यात्रा करीब 105 किलोमीटर लंबी होती है और इसमें भक्त नंगे पांव चलते हैं। इस बार का श्रावणी मेला सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा और तकनीकी सुविधाओं का भी उदाहरण बन गया है।
मेले की आधिकारिक शुरुआत सुल्तानगंज स्थित नमामि गंगे घाट से हुई, जहां बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी की अध्यक्षता में एक बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखा गया। इसके लिए 5000 स्क्वायर फीट में भव्य मंच बनाया गया है।
इसके अलावा श्रद्धालुओं के बैठने और आराम के लिए दो बड़े जर्मन हैंगर टेंट और 4000 स्क्वायर फीट में दो बड़े पंडाल बनाए गए हैं, जहां एक साथ 2000 से ज्यादा लोग बैठ सकते हैं।
श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए पर्यटन विभाग ने सुल्तानगंज से दुम्मा मोड़ तक चार जगहों पर टेंट सिटी बनाई है। यहां LED स्क्रीन भी लगाई गई हैं, जिनसे लोगों को मेला, कांवर यात्रा, सुरक्षा और व्यवस्था की पूरी जानकारी मिलेगी।
पूरे मेले की आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी ‘पिरामिड फेबकॉन‘ नाम की कंपनी को दी गई है, जिसने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने इस बार सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं:
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
- 200 से ज्यादा CCTV कैमरे
- ड्रोन कैमरे से निगरानी
- घुड़सवार पुलिस बल
- महिला और पुरुष सुरक्षा बल
- NDRF और SDRF की तैनाती
रेलवे स्टेशन पर अस्थायी GRP थाना और मेला क्षेत्र में 8 अस्थायी पुलिस थाने बनाए गए हैं। हर संवेदनशील जगह पर पुलिस बल और दंडाधिकारी की तैनाती की गई है।पूरे मेला क्षेत्र को 7 जोनों में बांटा गया है, ताकि सफाई व्यवस्था को ठीक तरीके से संभाला जा सके। तीन शिफ्ट में 750 सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं।नगर परिषद और जिला प्रशासन ने इन सुविधाओं की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। इनकी जिम्मेदारी है:
साफ-सफाई और ज़ोनल व्यवस्था
- साफ-सफाई
- लाइटिंग
- शुद्ध पेयजल
- सार्वजनिक शौचालय
- कचरा प्रबंधन
- खानपान दुकानों की जांच
इसके अलावा सभी होटलों को रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं से अधिक पैसे वसूलने से रोका जा सके।बाढ़ नियंत्रण विभाग ने गंगा घाटों पर 170 मीटर तक जियो बैग और ईसी बैग लगाए हैं ताकि फिसलन और कटाव से बचा जा सके। हालांकि कुछ जगहों पर जलजमाव की समस्या अब भी बनी हुई है, लेकिन प्रशासन उसे जल्दी सुलझाने में जुटा है।नमामि गंगे घाट को विशेष रूप से सजाया गया है।
नमामि गंगे घाट सजावट बना आकर्षण का केंद्र:
- सुंदर लाइटिंग
- LED डिस्प्ले
- स्वागत द्वार
- सूचना केंद्र
लगाए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को हर स्तर पर सहायता मिल सके।
इस बार का श्रावणी मेला आस्था, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था का बेहतरीन संगम बन गया है। श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा धाम की यात्रा पर निकल चुके हैं और प्रशासन हर कदम पर उनकी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए हर विभाग अलर्ट है और लोगों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए पूरी कोशिश की जा रही है। यह मेला बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक बन गया है।
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